विधायकों से अशिष्ट व्यवहार को विशेषाधिकार हनन मानने की मांग, मंत्री ने स्पीकर को लिखा पत्र

संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने विधानसभा अध्यक्ष से कार्य संचालन नियमावली में संबंधित प्रावधान जोड़ने का आग्रह किया है।

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रांची में विधायकों के विशेषाधिकार से जुड़े विषय पर पत्र लिखते संसदीय कार्य मंत्री का सांकेतिक दृश्य

रांची में संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने विधायकों के प्रति अधिकारियों और कर्मचारियों के कथित अशिष्ट व्यवहार का मुद्दा उठाया है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो को पत्र लिखकर जानबूझकर किए गए ऐसे व्यवहार को विशेषाधिकार हनन के दायरे में लाने की मांग की है।

पत्र में संविधान के अनुच्छेद 194 का उल्लेख किया गया है। मंत्री के अनुसार, विधायकों को सदन में भय या दबाव के बिना जनहित के विषय उठाने के लिए विशेषाधिकार प्राप्त हैं। उन्होंने अपमानजनक भाषा, सरकारी कार्यालय में असम्मानजनक व्यवहार और प्रोटोकॉल संबंधी निर्देशों की जानबूझकर अनदेखी जैसे मामलों पर कार्रवाई की व्यवस्था बनाने का आग्रह किया है।

राधाकृष्ण किशोर ने यह भी कहा कि सदन या उसके बाहर उठाए गए जनहित के विषयों को अधिकारियों द्वारा जानबूझकर टालने की शिकायतें सामने आती हैं। उनके मुताबिक, कई बार विधायकों के फोन नहीं उठाए जाते और उनके पत्रों पर समय से कार्रवाई भी नहीं होती।

मंत्री ने अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने करीब दो महीने पहले पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखा था, लेकिन अब तक उसका उत्तर नहीं मिला। उन्होंने इस स्थिति को अनुचित बताया और इसे प्रशासनिक व्यवस्था तथा जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद से जुड़ा गंभीर विषय माना।

उनका कहना है कि अधिकारी जब विधायकों के उचित सुझावों पर संज्ञान नहीं लेते, तब जनता के बीच जनप्रतिनिधियों की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है। इसी आधार पर उन्होंने विधानसभा की कार्य संचालन नियमावली में स्पष्ट प्रावधान जोड़ने की वकालत की है।

प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, किसी विधायक के साथ जानबूझकर अपमानजनक या अशिष्ट व्यवहार करने वाले अधिकारी अथवा कर्मचारी के विरुद्ध विशेषाधिकार हनन की कार्रवाई की जा सकेगी। फिलहाल यह मंत्री की ओर से विधानसभा अध्यक्ष को भेजी गई मांग है; नियमावली में किसी बदलाव या आगे की कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है।