गढ़वा जिले के विशुनपुरा क्षेत्र में रात के समय बालू लदे ट्रैक्टरों की आवाजाही का वीडियो सामने आने के बाद कथित अवैध बालू उठाव और परिवहन का मामला चर्चा में है। स्थानीय ग्रामीणों ने बांकी नदी के विभिन्न घाटों से बालू निकाले जाने का आरोप लगाते हुए प्रशासन से जांच और निगरानी बढ़ाने की मांग की है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ग्रामीणों का दावा है कि अमहर, सोनडीहा और महुली समेत कई घाटों से दिन में बालू निकालकर अलग-अलग स्थानों पर जमा किया जाता है। आरोप है कि इसके बाद रात में ट्रैक्टरों से ढुलाई शुरू होती है और यह सिलसिला सुबह तक चलता है। थाना और प्रखंड कार्यालय से करीब 300 मीटर की दूरी पर वाहनों की आवाजाही होने का दावा भी किया गया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इन घाटों से निकाली गई बालू विशुनपुरा के साथ रमना, बरडीहा, मेराल और मझिआंव थाना क्षेत्रों के गांवों तक पहुंचाई जाती है। हालांकि, बालू की आपूर्ति व्यवस्था और इसमें शामिल लोगों के बारे में कोई स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। ग्रामीणों ने परिवहन मार्गों पर भी निगरानी की मांग रखी है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि पहले करीब 800 रुपये प्रति ट्रैक्टर मिलने वाली बालू की कीमत अब लगभग 3,500 रुपये तक पहुंच गई है। उनके मुताबिक, बढ़ी कीमत से मकान बनवा रहे लोगों पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से उपलब्धता, मूल्यवृद्धि और आपूर्ति की वास्तविक स्थिति की जांच कराने को कहा है।
जिले में अवैध बालू उत्खनन और परिवहन रोकने के लिए उपायुक्त की ओर से विभिन्न विभागों के अधिकारियों वाली टास्क फोर्स गठित होने की जानकारी दी गई है। इसके बावजूद शिकायतें सामने आने पर ग्रामीण निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने मुख्यालय के चौक-चौराहों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखकर रात में गुजरने वाले ट्रैक्टरों का समय और मार्ग सत्यापित करने का सुझाव दिया है।
विशुनपुरा के एसडीओ प्रभाकर मिर्धा ने मामले के संबंध में कहा कि अवैध बालू के खिलाफ छापेमारी कर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल किसी छापेमारी, जब्ती या प्राथमिकी की जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में प्रशासनिक जांच और संभावित कार्रवाई के बाद ही बालू उठाव तथा परिवहन से जुड़े आरोपों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।