पाकुड़ शहर में शारदीय नवरात्र की षष्ठी पर विभिन्न दुर्गापूजा पंडाल श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलने के बाद पंडालों में दर्शन के लिए लोगों की आवाजाही शुरू हो गई। जयकारों, शंख और घंटियों के साथ पारंपरिक ढाक की ध्वनि से शहर का माहौल उत्सवमय बना रहा।
षष्ठी के अवसर पर पंडालों और मंदिरों में मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की विधि-विधान से पूजा की गई। आयोजनों के बीच श्रद्धालुओं ने प्रतिमाओं के दर्शन किए। पहले दिन से ही प्रमुख पूजा स्थलों पर लोगों की मौजूदगी देखी गई।
गांधी चौक, आंबेडकर चौक और रेलवे कॉलोनी सहित शहर के अलग-अलग पूजा पंडालों में विद्युत सज्जा की गई है। यहां स्थापित प्रतिमाएं भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। अमड़ापाड़ा स्थित वैष्णवी दुर्गा मंदिर के पंडाल और प्रतिमा को देखने भी लोग पहुंच रहे हैं।
सरस्वती पुस्तकालय में कपाट खुलने के कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त मेघा भारद्वाज, पुलिस अधीक्षक अनुदीप सिंह, एसडीओ साईमन मरांडी और एसडीपीओ कुमार गौरव मौजूद रहे। कार्यक्रम में पूजा आयोजन से जुड़े अध्यक्ष अम्लान कुसुम सिंह उर्फ बुल्टी तथा अन्य पदाधिकारी भी शामिल हुए।
पंडालों में बढ़ती आवाजाही के बीच जिला प्रशासन और पूजा समितियां भी व्यवस्था संभाल रही हैं। भीड़ को नियंत्रित करने तथा शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए संबंधित स्तर पर निगरानी रखी जा रही है। उत्सव आगे बढ़ने के साथ शहर के पूजा स्थलों पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की संभावना जताई गई है।
महासप्तमी पर मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की आराधना निर्धारित है। सुबह बेल के पेड़ के पास विशेष विधि से ‘कोला बोउ’ स्नान कराने और फिर शोभायात्रा के साथ उसे पूजा पंडाल में स्थापित करने का कार्यक्रम है। भारत सेवा आश्रम, रेलवे स्टेशन, राजा पाड़ा, सद्भावना क्लब, तलवाडांगा, महाकाल शक्तिपीठ, शहरकोल, मुर्की मांतल्ला और शिव शक्ति क्लब सहित विभिन्न पंडालों में दर्शन के लिए भीड़ बढ़ने की उम्मीद है।