श्रावणी पूर्णिमा पर बासुकिनाथ में 65,725 कांवरियों ने किया जलार्पण

राजकीय श्रावणी मेले के समापन पर बाबा फौजदारीनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की लंबी कतार रही। शिवगंगा घाट पर सुरक्षा के लिए एनडीआरएफ की टीम तैनात रही।

2 मिनट पढ़ें 2 बार पढ़ी गई
श्रावणी पूर्णिमा पर बासुकिनाथ मंदिर में जलार्पण के लिए कतार में खड़े कांवरिये

दुमका जिले के बासुकिनाथ धाम में शुक्रवार को श्रावणी पूर्णिमा के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, राजकीय श्रावणी मेला महोत्सव 2026 के समापन के दिन 65,725 कांवरियों ने बाबा फौजदारीनाथ की स्पर्श पूजा कर जल अर्पित किया। सुबह पुरोहित पूजा और सरकारी पूजा संपन्न होने के बाद गर्भगृह में जलार्पण शुरू हुआ, जो देर तक जारी रहा।

दर्शन और पूजा के लिए मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही। कतार संस्कार मंडप, फलाहारी धर्मशाला, क्यू कॉम्प्लेक्स, शिवगंगा पीड़ और कुशवाहा धर्मशाला तक पहुंची। मंदिर प्रांगण, शिवगंगा घाट और मेला क्षेत्र में भी कांवरियों की भीड़ रही। श्रद्धालुओं ने रक्षा सूत्र बांधकर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

पूर्णिमा पर संभावित भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने मंदिर क्षेत्र में अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को तैनात किया था। सुरक्षाकर्मी कतार को व्यवस्थित रखने और श्रद्धालुओं को गर्भगृह तक पहुंचाने में जुटे रहे। स्वयंसेवी संस्थाओं के सदस्यों ने भी कांवरियों की सेवा की तथा विभिन्न स्थानों पर पीने के पानी की व्यवस्था की गई।

मंदिर की संकीर्तनशाला के पास बने जलार्पण काउंटर से 11,463 श्रद्धालुओं ने पूजा की। इस व्यवस्था में पाइप के माध्यम से जल सीधे गर्भगृह स्थित शिवलिंग तक पहुंचाया जाता है। काउंटर पर लगाए गए आठ एलईडी टीवी पर श्रद्धालुओं को गर्भगृह में हो रहे जलार्पण का सीधा दृश्य भी दिखाया गया।

शिवगंगा घाट पर स्नान करने वालों की संख्या अधिक रहने के कारण सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए। एनडीआरएफ की टीम मोटर बोट से शिवगंगा में स्नान कर रहे श्रद्धालुओं की निगरानी करती रही। घाट पर अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों को भी तैनात रखा गया, ताकि भीड़ के दौरान किसी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

श्रावणी पूर्णिमा की धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धालुओं ने शिवगंगा और आसपास के नदी-तालाबों में स्नान के बाद पूजा-अर्चना की। मंदिर परिसर में दान-पुण्य भी किया गया। पूरे दिन बासुकिनाथ धाम में धार्मिक अनुष्ठान, जलार्पण और कांवरियों की आवाजाही जारी रही।