संयुक्त लॉकर में रखे स्त्रीधन पर पत्नी का अधिकार, हाई कोर्ट ने पति की अपील खारिज की

झारखंड हाई कोर्ट ने बोकारो फैमिली कोर्ट का आदेश बरकरार रखते हुए कहा कि पति पत्नी की सहमति या जानकारी के बिना संयुक्त बैंक लॉकर संचालित नहीं कर सकता।

2 मिनट पढ़ें 2 बार पढ़ी गई
रांची स्थित झारखंड हाई कोर्ट भवन की प्रतीकात्मक तस्वीर

रांची स्थित झारखंड हाई कोर्ट ने संयुक्त बैंक लॉकर में रखे स्त्रीधन से जुड़े वैवाहिक विवाद में पत्नी के अधिकार को बरकरार रखा है। जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने पति को पत्नी की सहमति या जानकारी के बिना लॉकर संचालित करने से रोकने वाले बोकारो फैमिली कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

यह विवाद बोकारो स्थित यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की एक शाखा के संयुक्त लॉकर से जुड़ा है। लॉकर पति-पत्नी दोनों के नाम पर दर्ज था। पत्नी ने फैमिली कोर्ट में दावा किया था कि विवाह के दौरान मायके और ससुराल से मिले सोने तथा अन्य आभूषण सुरक्षा के लिए इसी लॉकर में रखे गए थे। उन्होंने इन आभूषणों का अनुमानित मूल्य करीब 25 लाख रुपये बताया था।

वैवाहिक विवाद के बाद पत्नी ने घर छोड़ दिया था, जबकि उनके अनुसार स्त्रीधन लॉकर में ही रह गया। उनका आरोप था कि कई बार मांगने के बावजूद पति ने आभूषण वापस नहीं किए। इसके बाद उन्होंने स्त्रीधन की सुरक्षा और अपनी अनुमति के बिना संयुक्त लॉकर के संचालन पर रोक लगाने की मांग करते हुए बोकारो फैमिली कोर्ट का रुख किया।

पति ने इन आरोपों का खंडन किया और कहा कि पत्नी अपना पूरा स्त्रीधन साथ ले गई थी। उनका यह भी दावा था कि लॉकर में उनकी मां, बहन और भाभी के आभूषण रखे हुए हैं, इसलिए उसे केवल पत्नी के स्त्रीधन से संबंधित नहीं माना जा सकता। हाई कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा के बाद इस दलील को स्वीकार नहीं किया।

खंडपीठ ने पाया कि पति अपने दावे के समर्थन में ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके। उनकी मां, बहन या भाभी में से किसी को भी यह साबित करने के लिए गवाह नहीं बनाया गया कि लॉकर में उनके आभूषण थे। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि संबंधित लॉकर का संचालन विवाह के बाद शुरू हुआ था।

सभी तथ्यों और गवाही पर विचार करते हुए हाई कोर्ट ने दिसंबर 2024 में दिए गए बोकारो फैमिली कोर्ट के आदेश को कानूनी रूप से सही माना। इसके साथ ही पति की प्रथम अपील खारिज कर दी गई और पत्नी की सहमति अथवा जानकारी के बिना संयुक्त लॉकर के संचालन पर लगी रोक कायम रही।