सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के शुरुआती दो छंद अनिवार्य करने की मांग

कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर सरकारी समारोहों और विद्यालयी सभाओं में राष्ट्रीय गीत के शुरुआती दो छंदों का गायन अनिवार्य करने का आग्रह किया है।

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रांची में वंदे मातरम् के शुरुआती दो छंदों को अनिवार्य करने की मांग

रांची में कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन से जुड़ी एक नई व्यवस्था लागू करने की मांग की है। उन्होंने झारखंड के सरकारी कार्यक्रमों, औपचारिक समारोहों और विद्यालयों की सभाओं में गीत के शुरुआती दो छंदों का सामूहिक गायन अनिवार्य करने का अनुरोध किया है।

अपने पत्र में यादव ने इस प्रस्ताव के पीछे गीत के आरंभिक हिस्से की विषयवस्तु का उल्लेख किया है। उनका कहना है कि पहले दो छंद मातृभूमि के प्राकृतिक सौंदर्य और देश की भौगोलिक विशेषताओं का वर्णन करते हैं। इन छंदों में किसी खास धार्मिक प्रतीक या चित्रण का उल्लेख नहीं होने के कारण अलग-अलग धर्मों के लोग इन्हें सहज रूप से गा सकते हैं।

विधायक ने झारखंड में इस व्यवस्था के लिए कर्नाटक और केरल का उदाहरण भी दिया है। उन्होंने आग्रह किया है कि राज्य सरकार उन राज्यों की तर्ज पर सरकारी आयोजनों और स्कूलों की सभाओं के लिए स्पष्ट प्रावधान बनाए। फिलहाल यह विधायक की ओर से मुख्यमंत्री के समक्ष रखा गया प्रस्ताव है; इसे लागू किए जाने के संबंध में कोई सरकारी निर्णय सामने नहीं आया है।

पत्र में इस मांग के ऐतिहासिक आधार के रूप में दो घटनाओं का जिक्र किया गया है। यादव के अनुसार, वर्ष 1937 में कांग्रेस कार्यकारिणी की बैठक में गीत के शुरुआती दो छंद स्वीकार किए गए थे। उन्होंने 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा इन दो छंदों को राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किए जाने का भी उल्लेख किया है।

प्रदीप यादव ने कहा है कि देश के बहुधार्मिक और धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को ध्यान में रखते हुए झारखंड में भी ऐसी व्यवस्था अपनाई जानी चाहिए। अब इस पत्र पर राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और प्रस्ताव के संबंध में आगे की कार्रवाई की प्रतीक्षा है। मांग स्वीकार होने की स्थिति में इसका दायरा सरकारी कार्यक्रमों के साथ औपचारिक समारोहों और विद्यालयी सभाओं तक होगा।