सरायकेला छऊ नृत्य कला केंद्र के विकास, संरक्षण और संवर्धन के लिए तैयार 88 लाख 6 हजार 500 रुपये की परियोजना पर फिलहाल सहमति नहीं बन सकी है। समाहरणालय सभागार में हुई उच्चस्तरीय बैठक में प्रस्ताव के कुछ प्रावधानों का विरोध सामने आने के बाद कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ। अब कलाकारों को आपसी बैठक कर सहमति वाला प्रस्ताव जिला प्रशासन को सौंपने के लिए कहा गया है।
बैठक उपायुक्त की अध्यक्षता और खरसावां के विधायक दशरथ गागराई की मौजूदगी में हुई। इसमें अनुमंडल पदाधिकारी अभिनव प्रकाश, जिला खेल पदाधिकारी अमित कुमार, कोर कमेटी एवं स्टीयरिंग कमेटी के सदस्य तथा अन्य संबंधित लोग शामिल हुए। नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज चौधरी और आर्टिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष भोला महांती ने योजना का विरोध किया।
परियोजना जुलाई 2026 से मार्च 2027 तक नौ महीने के लिए तैयार की गई है। इसका उद्देश्य सरायकेला, मानभूम और खरसावां—छऊ की तीनों शैलियों को संरक्षित रखने के साथ कलाकारों को आर्थिक सहयोग देना है। प्रस्ताव में स्थानीय कलाकारों को प्रशिक्षक, वादक और नृत्य मंडली के सदस्य के रूप में अनुबंध पर रखने की व्यवस्था शामिल है।
योजना के अनुसार 12 से 20 वर्ष आयु वर्ग के 15 नृत्य प्रशिक्षार्थियों को तीन हजार रुपये प्रतिमाह तथा आठ से 12 वर्ष के 15 बाल प्रशिक्षार्थियों को दो हजार रुपये प्रतिमाह देने का प्रावधान है। ढोल और नगाड़ा सीखने वाले पांच कलाकारों तथा शहनाई और बांसुरी के दो-दो प्रशिक्षार्थियों के लिए भी दो हजार रुपये मासिक छात्रवृत्ति प्रस्तावित है।
मुखौटा और आभूषण निर्माण सीखने वाले तीन-तीन प्रशिक्षार्थियों को भी दो हजार रुपये प्रतिमाह देने की योजना है। केंद्र के संचालन के लिए समन्वयक, कंप्यूटर ऑपरेटर, अनुसेवी-सह-चौकीदार, सफाईकर्मी और परामर्शदाता जैसे पद रखने का प्रस्ताव भी बैठक में रखा गया। तीनों छऊ शैलियों के प्रशिक्षकों, वादकों, कलाकारों और प्रशिक्षार्थियों के लिए अलग-अलग प्रावधान बनाए गए हैं।
राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र वर्ष 2021 में स्थायी कर्मियों की सेवानिवृत्ति और वित्तीय कारणों से बंद हो गया था। उपलब्ध विवरण के मुताबिक स्थानीय कलाकार वर्ष 2024 से अपने स्तर पर केंद्र में नियमित अभ्यास कर रहे हैं। प्रशासन ने प्रस्ताव को आगे बढ़ाने से पहले कलाकारों से सहमति बनाने को कहा है, इसलिए परियोजना का अगला चरण उनके साझा प्रस्ताव पर निर्भर करेगा।