सिमडेगा के जिला परिषद डाक बंगला में झारखंड प्रजापति महासंघ की जिला इकाई का कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों के साथ जिले के विभिन्न प्रखंडों से महिला और पुरुष कार्यकर्ता शामिल हुए। बैठक में सामाजिक सुधार, शिक्षा, संगठन की मजबूती और पारंपरिक आजीविका से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
सम्मेलन में वक्ताओं ने शादी-विवाह के दौरान तिलक-दहेज, छेका और घर देखी जैसी खर्चीली परंपराओं को समाप्त करने की जरूरत बताई। उनका कहना था कि ऐसी प्रथाओं से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अनावश्यक बोझ बढ़ता है। समाज के स्तर पर सामूहिक पहल करते हुए इन परंपराओं को रोकने की रणनीति बनाने पर जोर दिया गया।
शिक्षा को सम्मेलन के प्रमुख विषयों में रखा गया। प्रदेश युवा संयोजक शंभु प्रजापति ने युवाओं से पढ़ाई के साथ संगठनात्मक गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा को प्राथमिकता देकर नई पीढ़ी के लिए बेहतर अवसर तैयार किए जा सकते हैं।
बैठक में पारंपरिक कुम्हारी पेशे के भविष्य पर भी चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने इस व्यवसाय को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और नए तथा आकर्षक उत्पाद तैयार करने की आवश्यकता बताई। सम्मेलन में इसे समुदाय की पारंपरिक पहचान और आजीविका से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में सामने रखा गया।
प्रदेश महामंत्री ईश्वर चंद्र प्रजापति ने बताया कि महासंघ का प्रांतीय महाधिवेशन 24 दिसंबर को आयोजित किया जाएगा। उससे पहले सदस्यता अभियान पूरा करने, सभी प्रखंड समितियों का गठन करने और जिला समिति का चुनाव कराने की योजना है। प्रवक्ता विक्रम महतो ने लोगों से महासंघ की सदस्यता लेकर संगठन को मजबूत बनाने की अपील की।
पूर्व माटीकला बोर्ड अध्यक्ष चंद्र प्रजापति ने समाज के अधिकारों का विषय उठाया। पूर्व विधायक और महासंघ के संरक्षक योगेश्वर महतो बाटुल ने संगठन की उपलब्धियों तथा आपसी एकजुटता की जरूरत पर बात की, जबकि प्रदेश अध्यक्ष देवनारायण प्रजापति ने सदस्यों से सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला कार्यकारी अध्यक्ष एवं प्रदेश उपाध्यक्ष ने की।