सलीमा टेटे की कप्तानी में भारत ने 44 साल बाद जीता एशियाई खेलों का महिला हॉकी स्वर्ण

चीन को फाइनल में 1-0 से हराकर भारतीय महिला हॉकी टीम ने स्वर्ण पदक जीता। सिमडेगा की सलीमा टेटे की कप्तानी वाली टीम में झारखंड की चार खिलाड़ी शामिल रहीं।

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भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान और सिमडेगा की खिलाड़ी सलीमा टेटे

सिमडेगा की सलीमा टेटे की कप्तानी में भारतीय महिला हॉकी टीम ने एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीत लिया है। शुक्रवार को खेले गए फाइनल में भारत ने चीन को 1-0 से पराजित किया। भारतीय टीम को महिला हॉकी में 44 साल बाद यह स्वर्ण सफलता मिली है।

फाइनल का एकमात्र और निर्णायक गोल लालरेमसियामी ने किया। चीन के खिलाफ मिली बढ़त को भारतीय खिलाड़ियों ने मुकाबले के अंत तक बनाए रखा। इस जीत के साथ भारतीय महिला हॉकी टीम ने ओलंपिक के लिए भी क्वालीफाई कर लिया है।

स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम में झारखंड की चार खिलाड़ी शामिल रहीं। सिमडेगा की सलीमा टेटे ने कप्तान के रूप में टीम का नेतृत्व किया, जबकि अनुभवी निक्की प्रधान फाइनल की शुरुआती एकादश का हिस्सा थीं। ब्यूटी डुंगडुंग और दीपिका सोरेंग भी भारतीय दल में शामिल रहीं।

सलीमा के लिए यह उपलब्धि विशेष महत्व रखती है। हॉकी के लिए पहचान रखने वाले सिमडेगा से निकलकर भारतीय टीम की कप्तानी तक पहुंचीं सलीमा ने अब अपने नेतृत्व में देश को एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक दिलाया है। टीम में राज्य की चार खिलाड़ियों की मौजूदगी से झारखंड के हॉकी प्रेमियों की खुशी भी बढ़ी है।

भारतीय महिला टीम ने इससे पहले 1982 के एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता था। उस प्रतियोगिता में भारत ने दक्षिण कोरिया को हराकर खिताब हासिल किया था। इसके बाद महिला हॉकी टीम को दोबारा स्वर्ण पदक तक पहुंचने के लिए 44 वर्षों का इंतजार करना पड़ा।

हॉकी झारखंड के महासचिव मनोज प्रसाद और हॉकी इंडिया के महासचिव भोलानाथ सिंह ने टीम को इस उपलब्धि पर बधाई दी। दोनों पदाधिकारियों ने सलीमा की कप्तानी और झारखंड की खिलाड़ियों के योगदान को राज्य तथा देश के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया।