सहायक आचार्य नियुक्ति के नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूले का अध्ययन करेगी बीआईटी मेसरा की समिति

झारखंड हाईकोर्ट ने बीआईटी मेसरा को समिति गठित कर सहायक आचार्य नियुक्ति में लागू नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूले का अध्ययन करने और रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

2 मिनट पढ़ें 6 बार पढ़ी गई
रांची स्थित झारखंड हाईकोर्ट की फाइल तस्वीर

रांची में झारखंड हाईकोर्ट ने सहायक आचार्य नियुक्ति में नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूला लागू किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए बीआईटी मेसरा को एक समिति गठित करने का निर्देश दिया है। यह समिति नियुक्ति प्रक्रिया में अपनाए गए फॉर्मूले से जुड़े पहलुओं का अध्ययन करेगी और अपनी रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेगी।

सुनवाई के दौरान झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूले के इस्तेमाल को उचित बताया। दूसरी ओर, याचिका दायर करने वाले प्रार्थियों की ओर से इस व्यवस्था का विरोध किया गया। दोनों पक्षों के अलग-अलग रुख के बीच अदालत ने विषय का अध्ययन कराने का रास्ता चुना है।

अदालत के निर्देश के अनुसार, बीआईटी मेसरा द्वारा गठित की जाने वाली समिति का काम सहायक आचार्य नियुक्ति में नॉर्मलाइजेशन लागू करने के मामले का अध्ययन करना होगा। उपलब्ध जानकारी में समिति के सदस्यों, उसके गठन की समयसीमा या रिपोर्ट जमा करने की निश्चित तारीख का उल्लेख नहीं किया गया है।

नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूले को लेकर जारी विवाद अब समिति की अध्ययन रिपोर्ट और उस पर अदालत में होने वाली आगे की सुनवाई से जुड़ गया है। फिलहाल हाईकोर्ट ने फॉर्मूले की वैधता या उसके प्रभाव पर कोई अंतिम निष्कर्ष दिए जाने की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। उस समय समिति की रिपोर्ट अदालत के सामने आने और संबंधित पक्षों द्वारा उस पर अपना पक्ष रखने की संभावना रहेगी। आगे की प्रक्रिया अदालत के निर्देश और प्रस्तुत सामग्री के आधार पर तय होगी।

यह मामला सहायक आचार्य नियुक्ति प्रक्रिया से संबंधित होने के कारण अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण है। अभी उपलब्ध तथ्यों के आधार पर इतना स्पष्ट है कि नॉर्मलाइजेशन के पक्ष और विरोध में रखी गई दलीलों के बीच अदालत ने तकनीकी अध्ययन के लिए बीआईटी मेसरा की समिति को जिम्मेदारी सौंपने का निर्देश दिया है।