सारंडा अभियान में भूमिका के लिए झारखंड पुलिस के 28 अधिकारियों-जवानों को दक्षता पदक

केंद्र ने विशेष अभियानों के लिए केंद्रीय गृह मंत्री पुलिस दक्षता पदक घोषित किया है। झारखंड के 28 अधिकारियों और जवानों को सारंडा में माओवादी विरोधी कार्रवाई के लिए सम्मान मिला है।

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सारंडा अभियान में भूमिका के लिए सम्मानित झारखंड पुलिस के अधिकारी और जवान

पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा क्षेत्र में माओवादियों के खिलाफ चलाए गए विशेष अभियानों में भूमिका निभाने वाले झारखंड पुलिस के 28 अधिकारियों और जवानों को केंद्रीय गृह मंत्री पुलिस दक्षता पदक के लिए चुना गया है। केंद्र सरकार ने शनिवार को विशेष अभियान, बेहतर अनुसंधान और फॉरेंसिक साइंस की श्रेणियों में पदकों की घोषणा की।

घोषणा के अनुसार, देशभर में विशेष अभियानों के लिए 357 अधिकारियों और जवानों को पदक दिया गया है। बेहतर अनुसंधान के लिए 123 और फॉरेंसिक साइंस में उल्लेखनीय कार्य के लिए नौ कर्मियों का चयन हुआ है। झारखंड के सभी 28 चयनित पुलिसकर्मियों को राज्य में माओवादी विरोधी अभियानों में योगदान के आधार पर सम्मानित किया गया है।

सम्मान पाने वालों में झारखंड जगुआर के आईजी अनूप बिरथरे, डीआईजी इंद्रजीत महथा और डिप्टी कमांडेंट मिथिलेश कुमार शामिल हैं। सूची में डीएसपी ज्ञान रंजन, चंदन कुमार, जयदीप लकड़ा और प्रदीप कुमार के साथ निरीक्षक, अवर निरीक्षक, सहायक अवर निरीक्षक, हवलदार और सिपाही स्तर के कर्मियों के नाम भी हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक वर्ष के दौरान सारंडा में चले विशेष अभियानों में इन पुलिसकर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अभियानों से माओवादी संगठनों को नुकसान पहुंचने, कई सदस्यों के मारे जाने और कुछ के आत्मसमर्पण करने की बात कही गई है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि कुछ माओवादी झारखंड छोड़कर दूसरे राज्यों में चले गए और वहां आत्मसमर्पण किया।

पदक सूची में डीएसपी से लेकर सिपाही तक अलग-अलग पदों पर कार्यरत कर्मियों को स्थान मिला है। इनमें रमेश मुर्मू, अमित रोशन कुल्लू, मनोरंजन प्रसाद सिंह, अमृत केरकेट्टा, संदीप तिर्की, प्रभात कुमार महतो, गौतम राणा और दीनबंधु हांसदा समेत अन्य पुलिसकर्मी शामिल हैं।

सारंडा पश्चिमी सिंहभूम जिले का वन क्षेत्र है, जहां माओवादी गतिविधियों के विरुद्ध लगातार अभियान चलाए गए हैं। घोषित सम्मान को इन्हीं अभियानों में सामूहिक स्तर पर निभाई गई जिम्मेदारी की मान्यता के रूप में देखा जा रहा है। चयनित 28 कर्मियों में अभियान का नेतृत्व करने वाले वरिष्ठ अधिकारियों के साथ जमीनी कार्रवाई में शामिल जवान भी शामिल हैं।