देवघर जिले के सारठ प्रखंड में पंचायत सचिवालयों की बुनियादी और तकनीकी सुविधाओं की कमी ग्रामीण सेवाओं को प्रभावित कर रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इंटरनेट, बिजली के वैकल्पिक इंतजाम और कंप्यूटर जैसी जरूरी सुविधाएं सुचारु नहीं होने के कारण पंचायत स्तर पर होने वाले कई कार्यों के लिए उन्हें प्रखंड कार्यालय या दूसरे स्थानों का चक्कर लगाना पड़ता है।
प्रखंड की 27 पंचायतों में से 24 में वर्षों पहले सोलर सिस्टम लगाए गए थे, लेकिन रखरखाव नहीं होने से ये खराब पड़े हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 14 पंचायत सचिवालयों में जेनरेटर की सुविधा नहीं है। शेष 13 पंचायतों में उपलब्ध जेनरेटर भी खराब बताए गए हैं। इससे बिजली बाधित होने पर सचिवालयों का कामकाज जारी रखना मुश्किल हो जाता है।
ऑनलाइन सेवाओं के लिए जरूरी इंटरनेट की स्थिति भी ठीक नहीं है। करीब 15 पंचायतों में इंटरनेट उपलब्ध नहीं होने या लंबे समय से खराब रहने की बात सामने आई है। सारठ, झिलुवा, बगड़बरा, केचुआबांक, जमुआसोल, नवादा, पत्थरड्डा और बसाहाटांड़ सहित कई पंचायतों में यह समस्या बताई गई है। पहले लगाया गया बीएसएनएल केबल भी अपेक्षित सेवा नहीं दे पा रहा है।
कई सचिवालयों में कंप्यूटर और लैपटॉप खराब हैं, जबकि कुछ स्थानों पर कंप्यूटर उपलब्ध ही नहीं हैं। इंटरनेट की अनुपलब्धता के कारण कर्मचारियों की बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज करने में भी परेशानी हो रही है। केचुआबांक और साधरिया पंचायत सचिवालयों में पेयजल की सुविधा नहीं होने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है।
ग्रामीणों के अनुसार, पंचायत मुख्यालयों में प्रज्ञा केंद्रों का नियमित संचालन नहीं होने से डिजिटल और ऑनलाइन सेवाएं स्थानीय स्तर पर नहीं मिल पा रही हैं। रोस्टर के अनुसार पंचायत और राजस्व कर्मियों की मौजूदगी तथा निर्धारित दिनों में काम के निष्पादन को लेकर भी लोगों ने सवाल उठाए हैं। इन कमियों का सीधा असर प्रमाणपत्र, आवेदन और अन्य छोटे सरकारी कार्य कराने वाले नागरिकों पर पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों ने प्रखंड विकास पदाधिकारी और संबंधित अधिकारियों से पंचायत सचिवालयों की व्यवस्था दुरुस्त कराने की मांग की है। उनका कहना है कि खराब सोलर सिस्टम, जेनरेटर, इंटरनेट और कंप्यूटर को चालू करने के साथ पेयजल तथा कर्मियों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि ग्रामीणों को पंचायत स्तर पर ही निर्धारित सरकारी सेवाएं मिल सकें।