गढ़वा जिले में मेराल-भवनाथपुर-चोपन रेल संपर्क की मांग को लेकर चल रहा अभियान अब सीमावर्ती उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों तक पहुंच गया है। आंदोलन से जुड़े लोग प्रस्तावित संपर्क को भवनाथपुर के साथ आसपास के गांवों और उत्तर प्रदेश के सोनभद्र क्षेत्र की परिवहन जरूरतों से जोड़ रहे हैं।
सोनभद्र के कोन में 20 सितंबर को रेल चलाओ संघर्ष समिति का गठन किया गया। बैठक में मेराल-भवनाथपुर से कोन और सलईबनवा तक रेल संपर्क विकसित करने तथा इस मार्ग पर यात्री ट्रेन चलाने की मांग रखी गई। समिति के अध्यक्ष की जिम्मेदारी लक्ष्मी कुमार जायसवाल को दी गई है।
अभियान से जुड़े लोगों के अनुसार, रेल संपर्क बनने से भवनाथपुर, खरौंधी, मझिआंव और विशुनपुरा सहित आसपास के गांवों को आवागमन का नया विकल्प मिल सकता है। उनका कहना है कि चोपन और सोनभद्र के रास्ते उत्तर प्रदेश से सीधा जुड़ाव होने पर स्थानीय लोगों के लिए व्यापार, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी यात्राएं आसान हो सकती हैं। ये संभावित लाभ आंदोलन से जुड़े लोगों की ओर से बताए गए हैं।
इस मांग को गांव स्तर तक ले जाने के लिए गढ़वा जिले के मझिआंव प्रखंड स्थित दवनकरा में 21 सितंबर को एक बैठक भी हुई। इसमें करीब 10 गांवों के ग्रामीण शामिल हुए। बैठक में पंचायतों और गांवों के बीच जनसंपर्क बढ़ाने तथा रेल संपर्क की मांग के समर्थन में अभियान का दायरा विस्तृत करने पर चर्चा की गई।
ग्रामीणों ने कहा है कि 15 दिनों के भीतर पहल नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। फिलहाल यह मांग संघर्ष समिति और स्थानीय ग्रामीणों की ओर से उठाई गई है। उपलब्ध विवरण में रेलवे या सरकार की ओर से किसी स्वीकृति, सर्वेक्षण अथवा निर्माण कार्यक्रम की जानकारी नहीं दी गई है।
अभियान से जुड़े लोगों ने आसपास के क्षेत्रों की करीब पांच लाख आबादी को इस पहल से जोड़ने का लक्ष्य बताया है। इसके लिए गांव और पंचायत स्तर पर संपर्क अभियान चलाने की तैयारी है। आगे की प्रगति रेलवे अथवा संबंधित सरकारी विभागों की औपचारिक प्रतिक्रिया और निर्णय पर निर्भर करेगी।