साहिबगंज जिले में फोरलेन एनएच-33 पर प्रस्तावित दो किलोमीटर लंबी डबल लेन सुरंग के लिए मिट्टी जांच शुरू हो गई है। मंडरो प्रखंड के करम्बी और बेतौना मौजा में जांच करने वाली कंपनी ने मशीन लगाई है। परियोजना पूरी होने पर मिर्जाचौकी से फरक्का के बीच सड़क संपर्क अधिक सुगम होने की उम्मीद है।
सुरंग स्थल पर पहाड़ के नीचे ड्रिलिंग कर मिट्टी के नमूने लिए जाएंगे। कंपनी के प्रतिनिधि के मुताबिक, प्रस्तावित सुरंग के लिए करीब पांच स्थानों पर मिट्टी की जांच की जानी है। इन नमूनों से मिली जानकारी का उपयोग परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट और निर्माण संबंधी तैयारियों में किया जाएगा।
परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी रोडिक कोष्टा नामक कंपनी को दी गई है। रिपोर्ट इस वर्ष के अंत तक तैयार होने की उम्मीद है। इसके बाद तीसरे चरण में सुरंग और करीब 12 किलोमीटर सड़क के लिए निविदा निकाली जाएगी। निविदा प्रक्रिया मार्च 2027 तक होने तथा निर्माण में कम से कम दो वर्ष लगने का अनुमान है।
अरवल से फरक्का तक प्रस्तावित फोरलेन एनएच-33 की कुल लंबाई 462.2 किलोमीटर बताई गई है। इसका 81.73 किलोमीटर हिस्सा साहिबगंज जिले में पड़ता है। पहले जिले में इसकी लंबाई 93 किलोमीटर थी, लेकिन एनएचएआई द्वारा मार्ग के संरेखण में बदलाव के बाद मिर्जाचौकी से फरक्का की दूरी घट गई है। पूरी परियोजना पर साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने की उम्मीद जताई गई है।
सड़क का निर्माण तीन चरणों में किया जा रहा है। पहले चरण में तालझारी के बांसकोला से उधवा के केलाबाड़ी तक 42.72 किलोमीटर सड़क बन चुकी है, जिस पर 1,508 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसे व्यावसायिक संचालन के लिए खोलने का प्रस्ताव मुख्यालय भेजा गया है। दूसरे चरण में मिर्जाचौकी से गंगा पुल और केलाबाड़ी से फरक्का तक कुल 24.88 किलोमीटर हिस्से पर काम चल रहा है। इसका ठेका 782.18 करोड़ रुपये में हुआ है।
तीसरे चरण में सुरंग समेत 14.13 किलोमीटर सड़क बनाई जानी है। इसी चरण में एनएच-33 को मल्टी मॉडल टर्मिनल से जोड़ने के लिए करीब दो किलोमीटर फोरलेन सड़क और पुराने एनएच-80 तथा रेलवे लाइन पर रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण भी प्रस्तावित है। सुरंग की दोनों लेन बीच-बीच में जुड़ी रहेंगी और इसके भीतर रोशनी की व्यवस्था भी की जाएगी।