साहिबगंज में दुर्गा प्रतिमाओं और पूजा के बाद बची सामग्री को सीधे गंगा या दूसरे जलस्रोतों में प्रवाहित नहीं किया जाएगा। नगर परिषद ने विसर्जन के लिए कृत्रिम स्थल तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है। यह व्यवस्था नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और अन्य संबंधित दिशा-निर्देशों के अनुरूप की जा रही है।
नगर परिषद की मुख्य तैयारी पुराने लंच घाट पर चल रही है। गंगा किनारे निर्धारित हिस्से में बांस-बल्लों से बैरिकेडिंग कर सुरक्षित स्थान बनाया जाएगा। शहर में स्थापित दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन इसी सीमित क्षेत्र में कराने की योजना है, ताकि प्रतिमाएं और पूजन सामग्री नदी के खुले प्रवाह में सीधे न जाएं।
विसर्जन के बाद नगर परिषद के कर्मचारी पानी से प्रतिमाओं के ढांचे और अन्य अपशिष्ट को निकालेंगे। इसके बाद सामग्री को घाट से दूर ले जाकर निर्धारित तरीके से निस्तारित किया जाएगा। अगले दिन भी घाट से बचे हुए ढांचे और अपशिष्ट हटाने की व्यवस्था रहेगी।
भीड़ को देखते हुए ब्रह्मस्थान घाट पर दूसरा कृत्रिम विसर्जन स्थल बनाने का विकल्प भी रखा गया है। पिछले वर्ष भी दो स्थानों पर ऐसी व्यवस्था की गई थी। आवश्यकता पड़ने पर दूसरे घाट का उपयोग होने से एक ही स्थान पर लोगों और प्रतिमाओं का दबाव कम किया जा सकेगा।
दोनों संभावित स्थलों पर रोशनी और हाइड्रा की व्यवस्था नगर परिषद के स्तर से की जाएगी। विसर्जन के दौरान परिषद के कर्मचारियों के साथ पुलिस बल की तैनाती भी प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य प्रतिमाओं के क्रमबद्ध विसर्जन और घाट पर जरूरी प्रबंधन सुनिश्चित करना है।
नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी अभिषेक कुमार सिंह के अनुसार, निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए आवश्यक तैयारी की जा रही है। प्रतिमाओं तथा पूजा अपशिष्ट को सीधे जल में डालने से रोकने वाली इस व्यवस्था का संबंध गंगा और अन्य जलस्रोतों के संरक्षण से है।