साहिबगंज में डॉल्फिन वॉचर्स को वैज्ञानिक फोटोग्राफी और पहचान का प्रशिक्षण

वन विभाग के दो दिवसीय प्रशिक्षण में डॉल्फिन की तस्वीरों से पहचान, आयु, लिंग, स्वास्थ्य और प्रजनन संबंधी आंकड़े जुटाने की तकनीक बताई गई।

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साहिबगंज में गंगा डॉल्फिन की तस्वीर लेते प्रशिक्षित फोटोग्राफर

साहिबगंज वन प्रमंडल के डॉल्फिन वॉचर्स के लिए आयोजित दो दिवसीय वैज्ञानिक फोटोग्राफी प्रशिक्षण शुक्रवार को संपन्न हो गया। वन प्रमंडल पदाधिकारी के नेतृत्व में हुए इस कार्यक्रम का उद्देश्य गंगा में पाई जाने वाली डॉल्फिन की गतिविधियों को कैमरे में व्यवस्थित ढंग से दर्ज करना और संरक्षण के लिए उपयोगी आंकड़े जुटाना था।

प्रशिक्षण में वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट, मुंबई के विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को डॉल्फिन की स्पष्ट तस्वीर लेने, सही कोण चुनने और उसकी प्रमुख शारीरिक विशेषताओं को पहचानने की जानकारी दी। भागलपुर और पश्चिम बंगाल के मालदा से आए प्रशिक्षकों ने फील्ड फोटोग्राफी के व्यावहारिक पहलुओं पर भी मार्गदर्शन दिया।

कार्यक्रम में बताया गया कि अच्छी गुणवत्ता वाली तस्वीरों से डॉल्फिन की शारीरिक लंबाई के आधार पर उसकी आयु का अनुमान लगाने में सहायता मिल सकती है। थूथन की लंबाई से नर और मादा की पहचान तथा शरीर पर दिखाई देने वाले लक्षणों से स्वास्थ्य और शारीरिक स्थिति का आकलन करने के तरीके भी समझाए गए।

डॉल्फिन के बच्चों की पहचान और उनकी मौजूदगी का नियमित रिकॉर्ड नदी में प्रजनन तथा अनुकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों को समझने में उपयोगी माना गया। प्रशिक्षित वॉचर्स की तस्वीरों से अलग-अलग डॉल्फिन की पहचान करने के साथ उनकी गतिविधियों, स्वास्थ्य और प्रजनन से जुड़ी सूचनाएं संकलित की जा सकेंगी।

केंद्र सरकार के निर्देश पर वन विभाग ने वर्ष 2024 के अंत में साहिबगंज क्षेत्र की गंगा में डॉल्फिन की गणना कराई थी, जिसमें 256 डॉल्फिन दर्ज की गई थीं। वर्ष 2025-26 के लिए राष्ट्रीय स्तर पर फिर गणना की गई है। इस वर्ष मार्च के आसपास पहुंची टीम ने वैज्ञानिक पद्धति से सर्वे किया था, जिसकी रिपोर्ट अभी जारी होनी है।

साहिबगंज जिले में मिर्जाचौकी से फरक्का तक गंगा के करीब 83 किलोमीटर हिस्से में डॉल्फिन पाई जाती हैं। केंद्र सरकार ने 2009 में गंगा डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया था। वैज्ञानिक निगरानी और नियमित आंकड़ा संकलन के लिहाज से वन विभाग का यह प्रशिक्षण स्थानीय संरक्षण प्रयासों को अधिक व्यवस्थित आधार दे सकता है।