साहिबगंज में धीमी गति से घट रही गंगा, दियारा के कई इलाके अब भी जलमग्न

साहिबगंज में गंगा खतरे के निशान से 1.30 मीटर ऊपर बह रही है। शहरी मोहल्लों में सफाई शुरू हुई है, जबकि दियारा क्षेत्र में पानी और पशु चारे की समस्या बनी हुई है।

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साहिबगंज में गंगा का जलस्तर घटने लगा है, लेकिन इसकी रफ्तार धीमी बनी हुई है। पिछले 12 घंटे में जलस्तर केवल दो सेंटीमीटर कम हुआ और नदी अब भी खतरे के निशान से 1.30 मीटर ऊपर बह रही है। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट में बुधवार सुबह छह बजे तक जलस्तर 28.54 मीटर रहने का अनुमान जताया गया है।

जिला मुख्यालय के कई मोहल्लों से बाढ़ का पानी लगभग निकल चुका है। हालांकि पानी उतरने के बाद अनेक स्थानों पर गंदगी फैल गई है। नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी अभिषेक कुमार सिंह के अनुसार, पानी से मुक्त हुए मोहल्लों में सफाई के साथ ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया जा रहा है। जहां पानी अब भी जमा है, वहां राहत सामग्री बांटने का काम जारी रहेगा।

सदर अंचल के दियारा क्षेत्र की स्थिति अभी कठिन बनी हुई है। कुछ संपर्क मार्गों से पानी निकल गया है या उसका स्तर कम हुआ है, लेकिन रामपुर टपुआ, मखमलपुर और लालबथानी सहित अधिकांश दियारा इलाकों में जलभराव है। कई घरों में पानी घुसा हुआ है और बड़ी संख्या में लोग प्रशासनिक शिविरों या अन्य सुरक्षित स्थानों पर शरण लिए हुए हैं।

जलस्तर घटने के साथ विस्थापित ग्रामीणों में घर लौटने की बेचैनी बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, दियारा की अधिकांश जमीन असर्वेक्षित है और बाढ़ के बाद सीमांकन मिटने से भूमि विवाद की आशंका रहती है। घर और जमीन की देखभाल के लिए कुछ लोग अब भी मचान या ऊंचे स्थानों पर डेरा डाले हुए हैं।

ग्रामीणों के सामने मवेशियों के चारे का संकट भी बना हुआ है। बाढ़ के कारण दियारा में हरी घास और फसल उपलब्ध नहीं है। जिला प्रशासन राजमहल, साहिबगंज और उधवा अंचलों में प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कर एनडीआरएफ के साथ राहत पहुंचा रहा है। पशुपालन विभाग की ओर से भी पशु चारा वितरित किया जा रहा है।

राजमहल प्रखंड के दाहुटोला में 600 बाढ़ प्रभावित लोगों को सूखी राहत सामग्री दी गई, जबकि 225 पशुपालकों के बीच चारा बांटा गया। जिला पुलिस चार स्थानों पर लंगर चलाकर प्रतिदिन सैकड़ों प्रभावित लोगों को गर्म भोजन उपलब्ध करा रही है। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों की जरूरतों का आकलन कर सहायता जारी रखने की बात कही है।