स्कूलों की आपदा सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय न्यूनतम ढांचा बनाने का प्रस्ताव शिक्षा मंत्रालय को भेजा गया

रांची के एक सामाजिक कार्यकर्ता के सुझाव पर एनडीएमए ने स्कूलों के लिए चेतावनी, सुरक्षित निकासी, जीवनरक्षक प्रशिक्षण और मॉक ड्रिल से जुड़ा प्रस्ताव शिक्षा मंत्रालय को भेजा है।

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स्कूलों में आपदा सुरक्षा और सुरक्षित निकासी व्यवस्था का प्रतीकात्मक दृश्य

झारखंड समेत देशभर के सरकारी, निजी और मान्यता प्राप्त स्कूलों में आपदा सुरक्षा की समान न्यूनतम व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव शिक्षा मंत्रालय को भेजा गया है। रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने रांची के सामाजिक कार्यकर्ता ज्योति शर्मा से मिले सुझावों को संज्ञान में लेते हुए आगे की कार्रवाई के लिए मंत्रालय को प्रेषित किया है।

ज्योति शर्मा ने 31 अगस्त को ईमेल के माध्यम से राष्ट्रीय न्यूनतम आपदा सुरक्षा एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया ढांचा तैयार करने की मांग की थी। एनडीएमए के अवर सचिव एसके शर्मा ने 25 सितंबर को जारी पत्र में बताया कि सुझावों को उचित कार्रवाई के लिए शिक्षा मंत्रालय के पास भेज दिया गया है। फिलहाल यह एक प्रस्ताव है और इसके लागू होने से संबंधित कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।

प्रस्ताव में प्रत्येक स्कूल के लिए स्थानीय जोखिम के आधार पर आपदा प्रबंधन और सुरक्षित निकासी योजना तैयार करने की बात कही गई है। बाढ़, भूकंप, आग और खराब मौसम जैसी अलग-अलग परिस्थितियों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया तय करने का सुझाव भी इसमें शामिल है।

आपात स्थिति की चेतावनी स्कूलों तक समय पर पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से जुड़ी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया है। प्रस्ताव के मुताबिक, निकासी का निर्णय लेने वाला जिम्मेदार व्यक्ति, परिसर से बाहर निकलने के रास्ते और बच्चों के एकत्र होने का सुरक्षित स्थान पहले से निर्धारित होना चाहिए।

स्कूलों में स्पष्ट जिम्मेदारियों वाली आपदा प्रबंधन टीम गठित करने के साथ शिक्षकों तथा संबंधित कर्मचारियों को सीपीआर और बेसिक लाइफ सपोर्ट का प्रशिक्षण देने की मांग भी की गई है। ऐसी शुरुआती जीवनरक्षक सहायता चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होने तक आपात स्थिति संभालने में उपयोगी हो सकती है।

नियमित मॉक ड्रिल को भी प्रस्ताव का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। इसके जरिए तैयारी की कमियों की पहचान करने और आपदा के समय व्यवस्थित कार्रवाई का अभ्यास कराने की बात कही गई है। प्रस्ताव में नेपाल में बाढ़ के दौरान समय पर चेतावनी, स्पष्ट निकासी योजना और प्रशिक्षित कर्मियों की सहायता से करीब 1,600 विद्यार्थियों की जान बचने की घटना का उदाहरण दिया गया है।