हजारीबाग स्थित डिटेंशन सेंटर में रह रही एक महिला से दुष्कर्म के मामले पर झारखंड हाईकोर्ट ने सोमवार को सुनवाई की। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि सेंटर में महिला की सुरक्षा के साथ उसकी शारीरिक और मानसिक जरूरतों को प्राथमिकता दी जाए तथा सभी आवश्यक सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है। घटना के संबंध में तीन पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। अदालत ने प्रशासनिक स्तर पर अब तक की गई कार्रवाई का पूरा विवरण भी मांगा है।
हजारीबाग जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने अपनी जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत के सामने पेश की। इसके बाद राज्य सरकार की ओर से शपथ पत्र दाखिल कर प्राथमिकी, पुलिसकर्मियों के निलंबन और जारी जांच की जानकारी दी गई। हाईकोर्ट ने महिला की मौजूदा स्थिति और डिटेंशन सेंटर में उपलब्ध व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान देने को कहा।
सुनवाई में महिला को बांग्लादेश भेजने की प्रक्रिया का विषय भी सामने आया। राज्य सरकार ने बताया कि इस संबंध में वर्ष 2023 से केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय को पत्र भेजे जा रहे हैं, लेकिन अब तक स्पष्ट उत्तर नहीं मिला है। संबंधित विभाग के सचिव ने अदालत को यह भी बताया कि वर्ष 2021 में बांग्लादेश सरकार से संपर्क किया गया था, पर कोई स्पष्ट सकारात्मक जवाब नहीं आया।
अदालत ने केंद्र सरकार के अधिवक्ता को राज्य की ओर से उठाए गए बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट करते हुए जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। महिला की देश वापसी से जुड़े आधिकारिक पत्राचार और प्रक्रिया की वास्तविक स्थिति भी अदालत के सामने रखी जानी है।
मामले की सुनवाई सोमवार को दो सत्रों में हुई। पहले सत्र में राज्य सरकार ने आवश्यक निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा, जिसके बाद दूसरे सत्र में शपथ पत्र के माध्यम से कार्रवाई का विवरण प्रस्तुत किया गया। आगे की सुनवाई में केंद्र के जवाब और जांच की प्रगति पर अदालत विचार करेगी।