हजारीबाग में शुक्रवार को पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने जल जीवन मिशन और अन्य पेयजलापूर्ति योजनाओं की समीक्षा की। बैठक में हजारीबाग के साथ रामगढ़, चतरा और कोडरमा के विभागीय पदाधिकारी शामिल हुए। मंत्री ने चारों जिलों में चल रही योजनाओं की प्रगति और उनकी जमीनी स्थिति की जानकारी मांगी।
समीक्षा के दौरान विभागीय पदाधिकारियों ने बताया कि संवेदकों की लापरवाही के कारण कई योजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पा रही हैं। इसके बाद संवेदकों और इंजीनियरों को आमने-सामने बैठाकर लंबित कामों पर चर्चा की गई। मंत्री ने अधूरे कार्य तीन महीने के भीतर पूरा करने का स्पष्ट निर्देश दिया।
मंत्री ने कहा कि तय अवधि में काम पूरा नहीं करने वाले संवेदकों को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। ऐसे मामलों में राशि की वसूली की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। बैठक के बाद उन्होंने बताया कि चारों जिलों की योजनाओं की समीक्षा में कार्यों की देरी का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया।
जल जीवन मिशन के वित्तपोषण पर मंत्री ने कहा कि केंद्र की ओर से योजना के लिए आंशिक राशि मिली है और राज्य सरकार अपने कोष से कार्यों को पूरा कराने में लगी है। उन्होंने अधिकारियों से ऐसे इलाकों की जानकारी देने को कहा, जहां लोगों तक पेयजल नहीं पहुंच रहा या वे चुआं खोदकर पानी लेने को मजबूर हैं।
बैठक में बड़कागांव क्षेत्र की चार योजनाओं का विषय भी उठा। मंत्री के अनुसार, एनटीपीसी की ओर से बंद की गई इन योजनाओं में लगभग 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका था। उन्होंने संबंधित पदाधिकारी को राशि वसूली की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया।
मंत्री ने यह भी कहा कि योजनाएं पूरी होने में वन और जमीन से जुड़ी अनापत्ति नहीं मिलने जैसी समस्याएं सामने आती हैं। उनके मुताबिक, राज्य में 96 हजार छोटी-बड़ी योजनाएं चल रही हैं। समीक्षा बैठक में अधिकारियों को इन अड़चनों को ध्यान में रखते हुए पेयजल योजनाओं को समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाने का निर्देश दिया गया।