हजारीबाग में मोती उत्पादन का विस्तार करेगी सरकार, आदर्श जिला बनाने की तैयारी

कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने नगवा और चुरचू में मत्स्य योजनाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने मोती उत्पादन को व्यवस्थित रूप देने और योजनाओं की नियमित जमीनी समीक्षा के निर्देश दिए।

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हजारीबाग के नगवा और चुरचू में मत्स्य योजनाओं का निरीक्षण करतीं कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की

हजारीबाग जिले में मोती उत्पादन को अधिक व्यवस्थित और व्यापक रूप देने की तैयारी है। कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने मंगलवार को नगवा और चुरचू गांवों का दौरा करते हुए कहा कि जिले को मोती की खेती के क्षेत्र में झारखंड का आदर्श जिला बनाने के लिए ठोस पहल की जाएगी। उन्होंने मत्स्य प्रभाग की योजनाओं के क्रियान्वयन का भी जायजा लिया।

निरीक्षण के दौरान मंत्री ने योजनाओं से जुड़े लाभुकों से सीधे बातचीत की। उन्होंने लाभुकों से योजनाओं के लाभ, उनके अनुभव और काम के दौरान सामने आ रही चुनौतियों की जानकारी ली। संवाद में ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर तैयार करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

मंत्री ने हजारीबाग में विकसित किए जा रहे पर्ल क्लस्टर को मत्स्य क्षेत्र में विविधता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, मोती की खेती से जुड़े किसानों को प्रति इकाई 16 हजार रुपये की सरकारी सहायता दी जा रही है। इस गतिविधि के जरिए किसान परंपरागत कृषि और मत्स्य पालन के साथ आय का एक अतिरिक्त माध्यम विकसित कर सकते हैं।

दौरे में बायोफ्लॉक योजना की प्रगति भी देखी गई। योजना के तहत 25 बायोफ्लॉक टैंक वाली एक इकाई की लागत करीब 25 लाख रुपये बताई गई है, जिस पर अधिकतम 60 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है। मंत्री ने कहा कि मत्स्य पालन युवाओं को गांव में ही स्वरोजगार और आमदनी के अवसरों से जोड़ सकता है।

शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि योजनाएं शुरू करने के साथ यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि उनका वास्तविक लाभ किसानों, युवाओं और ग्रामीण परिवारों तक पहुंचे। उन्होंने तकनीकी सहयोग को भी जरूरी बताया, ताकि लाभुक उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकें और गतिविधियों को टिकाऊ व्यवसाय का रूप दे सकें।

मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित जमीनी समीक्षा करने का निर्देश दिया। निरीक्षण के दौरान मत्स्य निदेशक और जिला कृषि पदाधिकारी भी उपस्थित थे। प्रस्तावित विस्तार की आगे की रूपरेखा और जिले में इससे जुड़ने वाले किसानों की संख्या का विवरण अभी उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।