रांची में वर्ष 2016 की हाईस्कूल शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जांच कर रहे वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमीशन में सुनवाई पूरी हो गई है। झारखंड हाईकोर्ट के आदेश पर गठित कमीशन ने अभ्यर्थियों, राज्य सरकार और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग का पक्ष सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। कमीशन की अध्यक्षता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस गौतम कुमार चौधरी कर रहे हैं।
अभ्यर्थियों की ओर से अंतिम बहस में नियुक्ति प्रक्रिया और मेरिट सूची को लेकर कई सवाल उठाए गए। उनके अधिवक्ताओं ने दावा किया कि जेएसएससी ने 1,18,434 अभ्यर्थियों की परीक्षा ली थी, जबकि मेरिट सूची केवल 48,981 अभ्यर्थियों की तैयार की गई। अधिक अंक प्राप्त करने के बावजूद नियुक्ति नहीं मिलने के मामलों का विवरण भी कमीशन के सामने रखा गया।
सुनवाई के दौरान उन अभ्यर्थियों का मुद्दा भी उठाया गया जिनकी उम्मीदवारी पहले रद्द की गई थी, लेकिन बाद में बहाल कर उन्हें सफल घोषित किया गया और नियुक्ति के लिए अनुशंसा भेजी गई। अभ्यर्थियों के पक्ष ने जिलावार तथा राज्यस्तरीय मेरिट सूची के आधार पर हुए चयन की व्यवस्था पर आपत्ति दर्ज कराई। ये दावे अभी जांच के दायरे में हैं और कमीशन का निर्णय आना बाकी है।
कमीशन ने पिछली सुनवाई में अभ्यर्थियों से नियुक्ति संबंधी जानकारी टेबुलर चार्ट में मांगी थी। राज्य सरकार और जेएसएससी को भी 24 अक्टूबर तक अतिरिक्त दस्तावेज देने का अवसर दिया गया था। उपलब्ध विवरण के अनुसार, आयोग की ओर से पहले पेश की गई राज्यस्तरीय मेरिट सूची को कमीशन ने पर्याप्त नहीं माना था। इसके बाद अतिरिक्त विवरण और दस्तावेज प्रस्तुत किए गए।
वर्ष 2016 में स्नातक स्तरीय प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से 17,752 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हुई थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, करीब 10 हजार पदों पर नियुक्तियां हुईं और बाकी पद रिक्त रह गए। अभ्यर्थियों का आरोप है कि एक ही परीक्षा में अलग-अलग स्तर की मेरिट सूची अपनाए जाने से कई योग्य उम्मीदवार नियुक्ति से वंचित हुए।
सभी पक्षों की दलीलें पूरी होने के साथ अब संबंधित अभ्यर्थियों की निगाह कमीशन के फैसले पर है। सुरक्षित रखा गया निर्णय जांच में उठाए गए प्रश्नों, पेश दस्तावेजों और सरकार तथा जेएसएससी के पक्ष के आधार पर आएगा। फिलहाल नियुक्ति प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष घोषित नहीं किया गया है।