रांची की विशेष पीएमएलए अदालत में जमीन से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले की शनिवार को हुई सुनवाई में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन उपस्थित नहीं हुए। उनकी ओर से व्यस्त कार्यक्रम का हवाला देते हुए व्यक्तिगत पेशी से छूट मांगी गई। अदालत ने उन्हें सोमवार, 21 सितंबर की शाम चार बजे तक पेश होने का समय दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार, सोरेन के विरुद्ध शनिवार को औपचारिक आरोप तय करने की प्रक्रिया होनी थी। उनके अधिवक्ता ने अगली तारीख देने का अनुरोध किया। दलीलें सुनने के बाद विशेष अदालत ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री व्यक्तिगत रूप से अदालत आ सकते हैं या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकते हैं। इसके बाद आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
यह सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट के शुक्रवार के आदेश के बाद हुई। सोरेन ने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर तत्काल रोक लगाने की मांग की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। उनकी दलील थी कि सार्वजनिक पद पर होने के कारण मुकदमा चलाने से पहले आवश्यक सरकारी अनुमति ली जानी चाहिए।
रिपोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश के हवाले से कहा गया है कि लोक सेवकों को उनके वैध सरकारी कार्यों के कारण अनुचित मुकदमों से बचाने वाली कानूनी सुरक्षा को प्रत्येक आपराधिक आरोप से बचाव की ढाल नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने शुरुआती तौर पर माना कि बड़गाईं क्षेत्र की 8.86 एकड़ आदिवासी जमीन और राजस्व अभिलेखों में कथित हेरफेर से जुड़े आरोप मुख्यमंत्री के वैध आधिकारिक कामकाज से संबंधित नहीं दिखते।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपित कृत्य का सरकारी दायित्व से संबंध था या नहीं, इसका अंतिम निर्णय मुकदमे के दौरान पेश साक्ष्यों के आधार पर होगा। अदालत ने साफ किया कि अंतरिम आवेदन पर की गई टिप्पणियां प्रारंभिक हैं और इन्हें मामले का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाए।
विशेष पीएमएलए अदालत को कानून के अनुसार सुनवाई आगे बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। वहीं, डिस्चार्ज याचिका खारिज होने के विरुद्ध सोरेन की मुख्य याचिका पर हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को निर्धारित है। फिलहाल विशेष अदालत के निर्देश के मुताबिक उनकी अगली पेशी 21 सितंबर शाम चार बजे तक होनी है।