हैदरनगर सिद्धपीठ देवी मंदिर में शारदीय नवरात्र मेला, 1887 से चली आ रही परंपरा

पलामू के हैदरनगर स्थित सिद्धपीठ देवी मंदिर में शारदीय नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ जुट रही है। परिसर में जिन्न बाबा की मजार पर फातेहा और चादरपोशी की परंपरा भी निभाई जाती है।

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पलामू के हैदरनगर स्थित सिद्धपीठ देवी मंदिर का नवरात्र मेला

पलामू जिले के हैदरनगर स्थित सिद्धपीठ देवी मंदिर में शारदीय नवरात्र का मेला चल रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यहां चैत्र और शारदीय नवरात्र में मेला लगाने की परंपरा वर्ष 1887 से चली आ रही है। इस अवसर पर झारखंड के अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से भी श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं।

मंदिर में आने वाले श्रद्धालु माता के दर्शन और पूजा-अर्चना के साथ अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं। मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां आराधना करने से बाधाओं से मुक्ति और संतान प्राप्ति होती है। श्रद्धालु नारियल, सिंदूर और चुनरी चढ़ाते हैं, जबकि चीनी से बनी मिठाई यहां का प्रमुख प्रसाद बताई गई है।

सिद्धपीठ परिसर की एक खास पहचान यहां मौजूद जिन्न बाबा की मजार भी है। मंदिर में पुजारी धार्मिक अनुष्ठान कराते हैं और मजार पर मुस्लिम मौलवियों की मौजूदगी में फातेहा तथा चादरपोशी की जाती है। एक ही परिसर में निभाई जाने वाली इन परंपराओं को स्थानीय स्तर पर आपसी सद्भाव के उदाहरण के रूप में देखा जाता है।

स्थानीय समाजसेवी पंडित कुंडल तिवारी के अनुसार, शुरुआती दौर में यहां एक छोटे कच्चे कमरे में छोटी मां की प्रतिमा स्थापित थी। समय बीतने के साथ मंदिर का विस्तार हुआ। परिसर में पहले रामलीला मंडली की प्रस्तुतियां भी आयोजित होती थीं। नागा बाबा के कार्यकाल में मंदिर का काफी विकास हुआ और बाद में मुनी बाबा ने लंबे समय तक पूजा-अर्चना कराई।

मंदिर परिसर में मुख्य गुंबदनुमा देवी मंदिर के अतिरिक्त राम-जानकी और शिव-पार्वती मंदिर भी हैं। यहां स्थित विशाल पीपल का पेड़ भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। इन धार्मिक स्थलों और पुरानी मेला परंपरा के कारण नवरात्र के समय हैदरनगर में बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही रहती है।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में शौचालय का निर्माण भी कराया गया है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, चार वर्ष बाद उपायुक्त दिलीप सिंह शेखावत की पहल पर यह सुविधा तैयार हुई। मंदिर समिति ने निर्माण के लिए प्रशासन के प्रति आभार जताया है। नवरात्र मेला, मंदिर की ऐतिहासिक परंपरा और मजार पर होने वाले अनुष्ठान मिलकर इस स्थल को पलामू के प्रमुख आस्था केंद्रों में विशिष्ट पहचान देते हैं।