14वीं जेपीएससी परीक्षा मामले में लालू कुमार यादव की अग्रिम जमानत याचिका खारिज

सीआईडी ने हजारीबाग के लालू कुमार यादव को अभय कुमार तिवारी और अभ्यर्थियों के बीच कथित कड़ी बताया है। अदालत ने जांच सामग्री के आधार पर उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

2 मिनट पढ़ें 4 बार पढ़ी गई
जेपीएससी परीक्षा अनियमितता मामले की जांच और अदालत के आदेश की सांकेतिक तस्वीर

रांची में विशेष अदालत ने 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक और एफआरओ परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में हजारीबाग के कोर्रा निवासी लालू कुमार यादव की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। 21 सितंबर के आदेश में अदालत ने सीआईडी की जांच और केस डायरी में उपलब्ध सामग्री का उल्लेख किया। लालू की ओर से आरोपों से इनकार किया गया है।

सीआईडी के अनुसार, मामले के मुख्य आरोपी बताए गए अभय कुमार तिवारी ने लालू को अपना एजेंट बताया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि लालू ने अभय और कुछ अभ्यर्थियों के बीच कथित संपर्क की भूमिका निभाई। अदालत ने उपलब्ध सामग्री के आधार पर माना कि इस भूमिका तथा परीक्षा से जुड़े कथित नेटवर्क की आगे जांच जरूरी है।

जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि लालू 14वीं जेपीएससी पीटी और एफआरओ परीक्षा में सफल हुआ था। सीआईडी ने इस सफलता को जांच के एक पहलू के रूप में रखा है। एजेंसी का यह भी दावा है कि तलाशी के दौरान उसके घर से किसी अन्य अभ्यर्थी की ओएमआर उत्तरपुस्तिका की तीन कार्बन प्रतियां मिली थीं।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, तलाशी में अभय कुमार तिवारी के हस्ताक्षर वाला आठ लाख रुपये का चेक और विभिन्न बैंक खातों से जुड़े कुछ खाली चेक भी बरामद हुए। सीआईडी ने लालू और अभय के बीच 1.40 लाख रुपये के यूपीआई लेनदेन मिलने का दावा भी किया है। एजेंसी इन दस्तावेजों और लेनदेन को कथित वित्तीय संबंध की जांच से जोड़कर देख रही है।

लालू की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत में कहा कि वह न जेपीएससी के कर्मचारी हैं और न ही टीडीपीएल से जुड़े हैं। बचाव पक्ष ने किसी आपत्तिजनक सामग्री की बरामदगी से इनकार करते हुए दलील दी कि उन्हें केवल संदेह के आधार पर आरोपी बनाया गया है।

अदालत ने केस डायरी की सामग्री और झारखंड प्रतियोगी परीक्षा अधिनियम, 2023 के प्रावधानों पर विचार करने के बाद अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। सीआईडी की जांच में अब कथित नेटवर्क के विस्तार, परीक्षा संबंधी दस्तावेजों, वित्तीय लेनदेन और अन्य लोगों की संभावित भूमिका की पड़ताल जारी रहने की बात सामने आई है। आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।