14वीं जेपीएससी परीक्षा में ओएमआर और सॉफ्टवेयर से छेड़छाड़ की जांच, 100 से अधिक अभ्यर्थियों पर सवाल

सीआईडी की जांच में परीक्षा एजेंसी से जुड़े कर्मी से पूछताछ के आधार पर ओएमआर शीट, पोर्टल और बैक-एंड डेटा में कथित हेरफेर की जानकारी सामने आई है।

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रांची में जेपीएससी परीक्षा की ओएमआर शीट और सॉफ्टवेयर से जुड़ी जांच का सांकेतिक दृश्य

रांची में 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग प्रतियोगिता परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच में नए तथ्य सामने आए हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सीआईडी ओएमआर शीट, परीक्षा पोर्टल और परिणाम तैयार करने वाले सॉफ्टवेयर में संभावित छेड़छाड़ के बिंदुओं की पड़ताल कर रही है। जांच में परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसी से जुड़े एक कर्मी से भी पूछताछ की गई है।

रिपोर्ट में सीआईडी की पूछताछ के हवाले से दावा किया गया है कि जेपीएससी के लिए तैयार सॉफ्टवेयर और पोर्टल का इस्तेमाल कथित फर्जीवाड़े में हुआ। जांच एजेंसी को यह भी बताया गया कि परीक्षा संबंधी तकनीकी काम में दूसरी कंपनी के लोग शामिल थे, लेकिन वे मुख्य एजेंसी के नाम से काम कर रहे थे। इन दावों की जांच अभी जारी है।

पूछताछ में सामने आई जानकारी के अनुसार, संबंधित एजेंसी ने 14वीं जेपीएससी की नियमित और बैकलॉग परीक्षा के अलावा ड्रग इंस्पेक्टर, सहायक लोक अभियोजक, सहायक वन संरक्षक तथा वन क्षेत्र पदाधिकारी जैसी परीक्षाओं के वन टाइम रजिस्ट्रेशन और प्रवेश पत्र तैयार करने का काम संभाला था। तकनीकी टीम ने पंजीकरण और दस्तावेज तैयार करने के लिए सॉफ्टवेयर विकसित किया था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आरोप है कि स्कैनिंग के लिए ओएमआर शीट मिलने के बाद पहले से चिह्नित अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं में सही विकल्प भरे जाते थे। कुछ शीट में पीडीएफ संपादन के जरिए अंक बढ़ाने और बैक-एंड सर्वर पर डेटा बदलने का दावा भी किया गया है। जांच में संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और तकनीकी रिकॉर्ड की सत्यता स्पष्ट होना बाकी है।

रिपोर्ट में पूछताछ से मिली जानकारी के आधार पर कहा गया है कि इस तरीके से 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा में 100 से अधिक अभ्यर्थियों को सफल कराया गया। यह संख्या फिलहाल जांच से जुड़ा दावा है; अंतिम निष्कर्ष के रूप में इसकी पुष्टि नहीं हुई है। सीआईडी परीक्षा प्रक्रिया में कथित हेरफेर और उससे जुड़े लोगों की भूमिका के विभिन्न पहलुओं की छानबीन कर रही है।

मामला प्रतियोगी परीक्षाओं की गोपनीयता और डिजिटल परिणाम प्रणाली की विश्वसनीयता से सीधे जुड़ा है। आगे की जांच से यह स्पष्ट होगा कि कथित बदलाव किन स्तरों पर हुए, उनका लाभ किन्हें मिला और उपलब्ध तकनीकी तथा दस्तावेजी साक्ष्य आरोपों की कितनी पुष्टि करते हैं।