झारखंड हाईकोर्ट ने दुमका के काठीकुंड थाना कांड से जुड़े राज कुमार भगत उर्फ राजकुमार भगत की जमानत अपील खारिज कर दी है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने 30 सितंबर को क्रिमिनल अपील संख्या 499/2026 पर फैसला सुनाते हुए निचली अदालत के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार किया। मामला 2013 में पुलिस दल पर हुए कथित माओवादी हमले से संबंधित है।
अभियोजन के अनुसार, 2 जुलाई 2013 को पाकुड़ के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में जा रहे पुलिस दल पर प्रतिबंधित संगठन एमसीसी के सदस्यों ने कथित हमला किया था। इसमें पुलिस अधीक्षक समेत पांच पुलिसकर्मियों की मौत हुई थी। काठीकुंड थाना कांड संख्या 55/2013 में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ यूएपीए, आर्म्स एक्ट और क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट की धाराएं लगाई गई थीं।
अपीलकर्ता की ओर से दलील दी गई कि उसका नाम प्राथमिकी में नहीं है और उसके पास से कोई आपत्तिजनक वस्तु बरामद नहीं हुई। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि अपराध की योजना, आर्थिक सहायता, इलेक्ट्रॉनिक निगरानी अथवा वित्तीय लेन-देन के माध्यम से उसे प्रतिबंधित संगठन से जोड़ने वाली ठोस सामग्री पेश नहीं की गई। अदालत को यह भी बताया गया कि 46 गवाहों में से अब तक 12 की गवाही हुई है।
हाईकोर्ट ने केस डायरी के दो अनुच्छेदों और अपने पुराने आदेश का उल्लेख किया। अदालत के मुताबिक, स्वतंत्र गवाहों ने आरोपी का नाम लेते हुए 29 जून 2013 को दुमका के जामनी में हुई एक बैठक में उसकी कथित मौजूदगी की बात कही थी। यह बैठक हमले से तीन दिन पहले हुई थी। इसी सामग्री के आधार पर 2023 में भी उसकी जमानत अपील खारिज की गई थी।
आरोपी ने कुछ सह-आरोपियों को मिली जमानत के आधार पर समानता का लाभ भी मांगा था। खंडपीठ ने कहा कि किसी दूसरे आरोपी को जमानत मिलना अपने आप में समानता का आधार नहीं बनता और प्रत्येक आरोपी की भूमिका तथा उपलब्ध सामग्री को अलग-अलग देखना आवश्यक है। अदालत ने पाया कि जिन सह-आरोपियों का हवाला दिया गया, उनके मामलों की परिस्थितियां अलग थीं।
अदालत ने यूएपीए के तहत जमानत की कसौटी का उल्लेख करते हुए कहा कि आरोपों के प्रथम दृष्टया सही दिखाई देने के पहलू पर विचार करना जरूरी है। हाईकोर्ट ने आरोपी की करीब तीन साल दस महीने की हिरासत और मुकदमे में देरी को स्वीकार किया, लेकिन उपलब्ध सामग्री तथा मामले की प्रकृति को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।