लोहरदगा से सामने आए सहायक आचार्य नियुक्ति के मामले में करीब 255 भाषा शिक्षक अभ्यर्थी संशोधित परिणाम और नियुक्ति पत्र की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कक्षा छह से आठ की नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े इन अभ्यर्थियों का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद भी उनकी नियुक्ति संबंधी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है।
यह विवाद सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल अवमानना याचिका, सिविल डायरी संख्या 59613/2025, से संबंधित बताया गया है। मामले की सुनवाई 28 अक्टूबर 2026 को न्यायमूर्ति उज्जवल भुइयां और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर की पीठ के समक्ष हुई थी। इस दौरान 17 सितंबर 2026 को पारित पहले के आदेश का भी संदर्भ आया था।
उपलब्ध विवरण के अनुसार, न्यायालय ने आरक्षित श्रेणी के अधिक अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को सामान्य श्रेणी में शामिल किए जाने के प्रश्न पर विचार किया था। आदेश में कहा गया था कि यदि किसी वैधानिक प्रावधान में रोक नहीं है, तो केवल प्रशासनिक निर्देश के आधार पर ऐसे अभ्यर्थियों को सामान्य श्रेणी में जाने से वंचित नहीं किया जा सकता।
प्रभावित अभ्यर्थियों का आरोप है कि न्यायालय की ओर से निर्धारित चार सप्ताह की अवधि बीतने के बाद भी झारखंड कर्मचारी चयन आयोग और राज्य सरकार ने अपेक्षित अनुपालन नहीं किया। उनका कहना है कि संशोधित परिणाम जारी नहीं होने और नियुक्ति पत्र की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने से चयन का इंतजार लंबा होता जा रहा है।
अभ्यर्थियों के अनुसार, परीक्षा और चयन प्रक्रिया से गुजरने के बावजूद नियुक्ति लंबित रहने से उन्हें मानसिक और आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। वे किसी अतिरिक्त रियायत के बजाय न्यायालय के आदेश के अनुरूप परिणाम और नियुक्ति प्रक्रिया पूरी किए जाने की मांग कर रहे हैं।
अवमानना याचिका पर अगली सुनवाई 4 नवंबर 2026 को दोपहर दो बजे निर्धारित बताई गई है। अभ्यर्थियों की निगाह अब इस सुनवाई पर है। मामले का आगे का रास्ता न्यायालय की कार्यवाही तथा आयोग और राज्य सरकार की ओर से रखे जाने वाले पक्ष के बाद स्पष्ट होने की संभावना है।