अंतिम तिथि पर देर से रिम्स पहुंची लोहरदगा की छात्रा, कार्यालय दोबारा खोलकर हुआ बीडीएस नामांकन

लोहरदगा की कविता को अंतिम दिन शाम में आवंटन पत्र मिला। कार्यालय बंद होने के बाद रिम्स पहुंचे संस्थान के चिकित्सकों और कर्मचारी ने देर रात तक दस्तावेज सत्यापन तथा ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी कर उनका बीडीएस प्रवेश सुनिश्चित किया।

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रांची के रिम्स डेंटल इंस्टीट्यूट में बीडीएस नामांकन प्रक्रिया पूरी करती छात्रा कविता

रांची के रिम्स डेंटल इंस्टीट्यूट में बीडीएस प्रवेश की अंतिम तिथि पर लोहरदगा की छात्रा कविता का नामांकन विशेष प्रयास से पूरा किया गया। वह शाम छह बजे के बाद संस्थान पहुंचीं, जबकि कार्यालय बंद होने का निर्धारित समय शाम पांच बजे था। स्थिति की जानकारी मिलने पर प्रवेश प्रक्रिया से जुड़े चिकित्सकों और कर्मचारी ने कार्यालय दोबारा खुलवाया।

कविता को बीडीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए आवंटन पत्र अंतिम दिन शाम में मिला था। इसके बाद वह रिम्स डेंटल कॉलेज पहुंचीं, लेकिन तब तक कार्यालय बंद हो चुका था। परिसर में मौजूद गार्ड ने पहले उन्हें अगले दिन आने की सलाह दी और वह निराश होकर घर लौटने के लिए निकल गईं।

बाद में गार्ड ने प्रवेश प्रभारी डॉ. बिष्णुपति सिंह को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। इसके बाद छात्रा से फोन पर संपर्क कर उन्हें जल्द संस्थान वापस आने को कहा गया। अंतिम तिथि के कारण उसी दिन नामांकन की औपचारिकताएं पूरी करना और संबंधित दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करना आवश्यक था।

डॉ. सुभाष चंद्र, डॉ. बिष्णुपति सिंह, डॉ. शांताल नाइक और डॉ. अभय जैन के साथ लिपिकीय कर्मचारी रंजन सिंह देर रात तक प्रवेश प्रक्रिया में जुटे रहे। छात्रा के आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन किया गया, औपचारिकताएं पूरी हुईं और दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड किए गए। इसके बाद बीडीएस पाठ्यक्रम में उनका प्रवेश सुनिश्चित हो सका।

रिम्स के निदेशक डॉ. डीके सिन्हा ने कार्यालय दोबारा खोलकर नामांकन कराने में सहयोग देने वाले चिकित्सकों और कर्मचारी के प्रयास की प्रशंसा की। उनके अनुसार, उस दिन ही प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर छात्रा को प्रवेश संबंधी नियमों के तहत गंभीर शैक्षणिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता था।

इस घटनाक्रम में समय पर सूचना पहुंचना और प्रवेश दल का तत्काल सक्रिय होना निर्णायक रहा। अंतिम दिन देर से आवंटन पत्र मिलने के बावजूद संस्थान ने नियमों के दायरे में दस्तावेजों की जांच और ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी की, जिससे लोहरदगा की छात्रा का बीडीएस में प्रवेश अधूरा नहीं रहा।