पाकुड़ जिले के अमड़ापाड़ा स्थित वैष्णवी दुर्गा मंदिर में रविवार को कलश स्थापना के साथ शारदीय नवरात्र का शुभारंभ हुआ। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की विधि-विधान से पूजा की गई। इस अवसर पर मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कलश स्थापना की प्रक्रिया अभिजीत मुहूर्त में पूरी की गई। सार्वजनिक दुर्गापूजा समिति के अध्यक्ष संजीव कुमार उर्फ बबलू भगत ने स्थानीय बांसलोई नदी से कलश में जल भरा और उसे वैष्णवी दुर्गा मंदिर लाकर स्थापित किया। इसके बाद नवरात्र की पूजा और अन्य धार्मिक अनुष्ठान प्रारंभ हुए।
बनारस से आए आचार्य सुनील मिश्रा और आचार्य नागेश मिश्रा ने वेदी पूजन कराया। मां शैलपुत्री का आह्वान करने के बाद पाठ और पूजा-अर्चना की गई। अनुष्ठान के क्रम में श्रद्धालुओं ने पुष्पांजलि अर्पित की और आरती में भाग लिया। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं ने भी संकल्प लेकर मां दुर्गा की आराधना शुरू की।
आयोजन में बताया गया कि अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना के साथ नवरात्र आरंभ होता है। पर्व के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है और प्रत्येक दिन देवी के एक विशिष्ट स्वरूप को समर्पित रहता है।
पहले दिन पूजी जाने वाली मां शैलपुत्री को हिमालय की पुत्री के रूप में जाना जाता है। पूजा के दौरान दशरथ भगत, राज आनंद, सरोज मंडल, ओमप्रकाश भगत, पुरोहित शम्भूनाथ झा, संदीप ओझा, निखिल कुमार, नीतीश कुमार और राजा भारती समेत स्थानीय लोग मौजूद थे।
कलश स्थापना और आरती के दौरान मंदिर में श्रद्धा का वातावरण रहा तथा जय माता दी के जयकारे गूंजते रहे। इस अनुष्ठान के साथ अमड़ापाड़ा में नवरात्र के नौ दिवसीय धार्मिक आयोजन की औपचारिक शुरुआत हो गई है। आने वाले दिनों में श्रद्धालु मां दुर्गा के क्रमशः अलग-अलग स्वरूपों की आराधना करेंगे।