अयोध्या दीपोत्सव में पहली बार होगी सरायकेला छऊ की प्रस्तुति, 10 सदस्यीय दल रवाना

सरायकेला का 10 सदस्यीय छऊ दल अयोध्या के लिए रवाना हो गया है। दीपोत्सव में कलाकार श्रीराम के आगमन, उल्लास और दीपों के प्रकाश से जुड़े भावों को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत करेंगे।

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सरायकेला की प्रसिद्ध छऊ नृत्य परंपरा पहली बार अयोध्या के भव्य दीपोत्सव में अपनी कला प्रस्तुत करेगी। इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए 10 सदस्यीय कलाकार दल बुधवार को सरायकेला से अयोध्या रवाना हुआ। प्रस्तुति के जरिए झारखंड की इस विशिष्ट नृत्यशैली को राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा।

कार्यक्रम का आयोजन संगम परफॉर्मेंस आर्ट्स फाउंडेशन की ओर से किया जा रहा है। इसमें सरायकेला छऊ की पारंपरिक शैली को नए नृत्य-संयोजन के साथ मंच पर उतारने की तैयारी है। प्रस्तुति की मूल परिकल्पना श्रीराम के अयोध्या आगमन से जुड़े आनंद, उत्साह और दीपों के प्रकाश पर केंद्रित रखी गई है।

कलाकार नृत्य, भावाभिनय, शारीरिक मुद्राओं और लयबद्ध गतियों के माध्यम से उत्सव के अलग-अलग भावों को अभिव्यक्त करेंगे। प्रस्तुति में श्रीराम से जुड़े सत्य, अहिंसा और न्याय के आदर्शों के साथ अयोध्यावासियों की उत्सवी भावना को भी स्थान दिया गया है। दीप प्रज्वलन, उमंग और आध्यात्मिक चेतना इसके प्रमुख विषय होंगे।

नृत्य प्रस्तुति का निर्देशन और कोरियोग्राफिक संयोजन गुरु गणेश कुमार परिछा, गुरु शिवचरण साहू तथा गुरु राजतेंदु रथ के संयुक्त मार्गदर्शन में किया जाएगा। तैयारी में पारंपरिक मौलिकता और सरायकेला छऊ के विशिष्ट नृत्य-सौंदर्य को बनाए रखते हुए नई मंचीय संरचना तैयार की जा रही है।

दल में गुरु राजतेंदु रथ, गुरु गणेश कुमार परिछा, गुरु कुस्मी पटनायक, निबारण महतो, काली प्रसन्न सारंगी, विजय सरदार, बैसागु सरदार, सूर्यनारायण रथ, सुचित्रा रथ और गायत्री रथ शामिल हैं। ये कलाकार सामूहिक प्रस्तुति के माध्यम से सरायकेला की गुरु-शिष्य परंपरा और नृत्य कौशल का परिचय देंगे।

अयोध्या दीपोत्सव में भागीदारी सरायकेला छऊ के लिए एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक अवसर है। पारंपरिक शैली और नए संयोजन वाली यह प्रस्तुति झारखंड तथा अयोध्या के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव को सामने लाएगी। इसके साथ ही राष्ट्रीय आयोजन में झारखंड की कला परंपरा और भारतीय सांस्कृतिक विविधता की उपस्थिति भी दर्ज होगी।