गिरिडीह जिले के पीरटांड़ क्षेत्र स्थित मधुबन में संथाल समाज का दो दिवसीय मरांग बुरु धोरोमगाड़ महासम्मेलन बुधवार को शुरू हुआ। मरांग बुरु पारसनाथ की तलहटी में स्थित दिशोम मांझीथान में पारंपरिक पूजा-अर्चना और धर्मध्वज फहराने के साथ कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया। आयोजन में झारखंड समेत विभिन्न राज्यों से आए करीब डेढ़ हजार प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
धार्मिक अनुष्ठान पूरे होने के बाद प्रतिभागी ढोल-मांदर के साथ जुलूस के रूप में तलेटी तीर्थ धर्मशाला पहुंचे। वहां आयोजित मंचीय कार्यक्रम में अतिथियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। महासम्मेलन में संथाल समाज के प्रतिनिधियों के साथ सामाजिक कार्यकर्ता और धर्मगुरु भी शामिल हुए हैं।
मरांग बुरु बचाओ संघर्ष मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष फागु बेसरा ने आयोजन की पृष्ठभूमि और उद्देश्यों की जानकारी दी। उन्होंने संथाल समाज की आस्था, संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और पहचान को सुरक्षित रखने की जरूरत पर जोर दिया। वक्ताओं ने समाज की विशिष्ट पूजा पद्धतियों और मान्यताओं के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता बताई।
पहले दिन की चर्चा में सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक एकजुटता और धार्मिक अधिकारों से जुड़े विषय प्रमुख रहे। प्रतिभागियों ने मरांग बुरु के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को व्यापक स्तर पर पहुंचाने, समाज की भावी दिशा तय करने तथा नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया। आयोजन के माध्यम से धार्मिक विरासत और सामूहिक एकता का संदेश देने का प्रयास किया गया।
गुरुवार को होने वाले समापन समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कल्पना सोरेन और अन्य नेताओं के शामिल होने का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने कार्यक्रम स्थल और मधुबन के प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा तथा यातायात संबंधी तैयारियां की हैं। प्रमुख चौक-चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस बल तैनात किया गया है, जबकि अधिकारी व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं।