आईएएस विनय चौबे का निलंबन समाप्त, कार्मिक विभाग में दिया योगदान

झारखंड सरकार द्वारा निलंबन समाप्त किए जाने के बाद 1999 बैच के आईएएस अधिकारी विनय चौबे ने रांची में कार्मिक विभाग में योगदान दिया है। उनकी अगली पदस्थापना का आदेश अभी प्रतीक्षित है।

2 मिनट पढ़ें 2 बार पढ़ी गई
रांची में कार्मिक विभाग में योगदान देने वाले आईएएस अधिकारी विनय चौबे

रांची में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विनय चौबे ने निलंबन समाप्त होने के बाद कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग में योगदान दिया है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक कार्मिक विभाग ने उनके योगदान को स्वीकार कर आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया के लिए संबंधित संचिका मुख्य सचिव के पास भेजी है। फिलहाल उनकी नई पदस्थापना का आदेश जारी होने का इंतजार है।

विनय चौबे झारखंड कैडर के 1999 बैच के अधिकारी हैं। प्रकाशित जानकारी के अनुसार, झारखंड सरकार ने न्यायालय से जमानत मिलने और संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं के बाद उनका निलंबन समाप्त किया। इसके बाद उन्होंने गुरुवार को कार्मिक विभाग में अपनी आधिकारिक उपस्थिति दर्ज कराई।

रिपोर्ट में कहा गया है कि चौबे शराब घोटाले और हजारीबाग में वन भूमि से जुड़े मामले में जांच के दायरे में रहे हैं। ये आरोप न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। उन्हें पिछले महीने सर्वोच्च न्यायालय से सशर्त जमानत मिली थी। अदालत ने जांच में सहयोग करने, गवाहों को प्रभावित नहीं करने और अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ने जैसी शर्तें रखी थीं।

उपलब्ध विवरण के अनुसार, वह 14 महीने से अधिक समय जेल में रहे। जमानत के बाद रिहाई और निलंबन समाप्त होने के पश्चात कार्मिक विभाग में उनका योगदान प्रशासनिक सेवा में वापसी की औपचारिक प्रक्रिया का हिस्सा है। विभागीय योगदान और किसी पद पर नियुक्ति अलग-अलग चरण हैं, इसलिए अगली जिम्मेदारी की स्थिति पदस्थापना आदेश से ही स्पष्ट होगी।

चौबे इससे पहले मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव के साथ जल संसाधन, योजना-सह-वित्त और आबकारी जैसे विभागों में जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उनके पिछले प्रशासनिक अनुभव के कारण अगली तैनाती को लेकर चर्चा है, लेकिन उपलब्ध जानकारी में किसी निश्चित विभाग या पद की घोषणा नहीं की गई है।

अब कार्मिक विभाग की संचिका पर आगे की कार्रवाई और सरकार के पदस्थापना आदेश पर नजर रहेगी। मुख्यमंत्री से निर्देश मिलने के बाद उन्हें किसी विभाग में नियुक्त किए जाने की बात रिपोर्ट में कही गई है। तब तक उनके लिए किसी संभावित पद या विभाग को तय मानना उचित नहीं होगा।