आत्मसमर्पण करने वाले पूर्व नक्सलियों के आधार और बैंक खाते बनवा रही झारखंड पुलिस

झारखंड में ‘ऑपरेशन नवजीवन’ के तहत आत्मसमर्पण करने वाले पूर्व नक्सलियों और उनके परिवारों को पहचान पत्र, बैंकिंग तथा पुनर्वास योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है।

2 मिनट पढ़ें 4 बार पढ़ी गई
रांची में आत्मसमर्पण करने वाले पूर्व नक्सलियों के पुनर्वास से जुड़ी प्रक्रिया

रांची में झारखंड पुलिस और राज्य प्रशासन आत्मसमर्पण करने वाले पूर्व नक्सलियों को सामान्य नागरिक जीवन से जोड़ने के लिए उनके आधार कार्ड तथा बैंक खाते बनवा रहे हैं। यह काम संयुक्त पहल ‘ऑपरेशन नवजीवन’ के तहत किया जा रहा है। लंबे समय तक जंगलों में रहने के कारण कई पूर्व नक्सलियों के पास पहचान और बैंकिंग से जुड़े जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे।

इस अभियान में आत्मसमर्पण के बाद संबंधित व्यक्ति का डेटाबेस तैयार कर उसे आधार से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की जाती है। इसके बाद प्रशासन राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और पैन कार्ड जैसे दूसरे दस्तावेज बनवाने में भी सहयोग करता है। बैंक खाता खुलने से पुनर्वास के तहत मिलने वाली सहायता और अन्य सुविधाएं बैंकिंग व्यवस्था के माध्यम से उपलब्ध कराने का रास्ता बनता है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पहचान संबंधी दस्तावेज तैयार करना पुनर्वास प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनका मानना है कि केवल कानूनी प्रक्रिया पूरी कराना पर्याप्त नहीं है। हथियार छोड़ने वाले लोगों को सरकारी व्यवस्था, आर्थिक गतिविधियों और सामाजिक जीवन से जोड़ने के लिए पहचान तथा वित्तीय सुरक्षा भी जरूरी है।

आईजी अभियान नरेंद्र सिंह के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों को पुनर्वास एवं आत्मसमर्पण नीति के अंतर्गत कई सुविधाएं देने का प्रावधान है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, राज्य में आत्मसमर्पण कर चुके 124 पूर्व नक्सली ओपन जेल में रह रहे हैं। इस वर्ष 50 से अधिक नक्सलियों के हथियार छोड़ने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है।

नीति में आत्मसमर्पण करने वाले व्यक्तियों और उनके परिवारों के लिए बच्चों की देखभाल एवं शिक्षा, चार डिसमिल जमीन, बैंक ऋण से जुड़ी सहायता और पांच लाख रुपये तक के ऋण का प्रावधान बताया गया है। इसके अतिरिक्त निशुल्क कानूनी सहायता के लिए अधिवक्ता उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी शामिल है। रोजगार और आवास जैसी सरकारी सुविधाओं से जोड़ने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।

अधिकारियों ने बताया कि आधार कार्ड और बैंक खाते तैयार कराने समेत पुनर्वास से जुड़े कार्यों की लगातार समीक्षा हो रही है। इन प्रक्रियाओं की निगरानी के लिए एक समिति भी गठित की गई है। प्रशासन का उद्देश्य आत्मसमर्पण करने वालों को दस्तावेज, सरकारी योजनाओं और आर्थिक व्यवस्था से जोड़कर उनके सामाजिक पुनर्स्थापन को मजबूत करना है।