हजारीबाग के 20 चौराहों पर चार महीने में ऑटोमेटेड ट्रैफिक लाइट का ट्रायल शुरू करने का आदेश

झारखंड हाई कोर्ट ने हजारीबाग की यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए समयबद्ध निर्देश दिए हैं। खराब सिग्नल 48 घंटे में ठीक करने और पार्किंग व अतिक्रमण पर कार्रवाई को भी कहा गया है।

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हजारीबाग शहर के यातायात सुधार से संबंधित सांकेतिक दृश्य

झारखंड हाई कोर्ट ने हजारीबाग शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए विस्तृत और समयबद्ध निर्देश जारी किए हैं। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने शहर के 20 प्रमुख चौक-चौराहों पर चार महीने के भीतर ऑटोमेटेड ट्रैफिक लाइट मैनेजमेंट सिस्टम का ट्रायल शुरू करने को कहा है। अदालत ने जनहित याचिका पर सुनवाई पूरी करने के बाद सुरक्षित रखा गया फैसला मंगलवार को सुनाया।

अदालत ने हजारीबाग के उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक और नगर आयुक्त को यातायात सुधार के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया है। तीनों अधिकारियों को चार महीने के भीतर अपने अनुपालन से संबंधित शपथपत्र दाखिल करना होगा। यह जनहित याचिका वर्ष 2021 में अच्युत स्वरूप मिश्रा ने दाखिल की थी, जिसमें अव्यवस्थित यातायात, फुटपाथों पर अतिक्रमण, पार्किंग की कमी, खराब सिग्नल और निष्क्रिय सीसीटीवी का मुद्दा उठाया गया था।

अदालत के निर्देश पर अधिवक्ता आयुक्त प्रशांत पल्लव ने शहर का निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट में कई प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस की अनुपस्थिति, खराब सिग्नल, बेतरतीब पार्किंग और नियमों के पालन में लापरवाही की बात सामने आई। नई निविदा प्रक्रिया के तहत 19 अगस्त 2026 को कीहोल डिजाइन प्राइवेट लिमिटेड के साथ करीब 2.68 करोड़ रुपये का समझौता किए जाने का भी आदेश में उल्लेख है।

नई व्यवस्था में जिला कोर्ट, कोर्रा, बाबूगांव, मटवारी, सेंट कोलंबा कॉलेज मोड़, बड़कागांव मोड़, भारत माता चौक, पीटीसी चौक, डीवीसी चौक, सर्किट हाउस चौक, इंद्रपुरी चौक, झंडा चौक तथा पुराने और नए बस स्टैंड समेत प्रमुख स्थान शामिल हैं। सिग्नलों के रखरखाव के लिए नगर निगम, ट्रैफिक पुलिस और संबंधित कंपनी के प्रतिनिधि वाली तीन सदस्यीय निगरानी टीम बनाने का निर्देश दिया गया है। किसी सिग्नल में खराबी आने पर उसे 48 घंटे में दुरुस्त करना होगा।

हाई कोर्ट ने प्रमुख चौराहों पर जेब्रा क्रॉसिंग और जरूरी यातायात संकेतक लगाने को भी कहा है। सुबह आठ से रात आठ बजे तक अधिसूचित नगर निगम क्षेत्र में भारी और व्यावसायिक मालवाहक वाहनों के प्रवेश पर रोक लागू करने का निर्देश है, हालांकि आवश्यक सेवाओं को इससे छूट मिलेगी। निर्धारित पार्किंग स्थलों का नक्शा तीन महीने में पेश करने और फुटपाथों से अतिक्रमण हटाने को कहा गया है।

इसके अलावा चार महीने में वेंडिंग और नॉन-वेंडिंग जोन अधिसूचित करने तथा बाइपास पर बस टर्मिनल के लिए जमीन की स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया गया है। खंडपीठ ने कहा कि वित्तीय कमी, प्रशासनिक असुविधा या विभागीय समन्वय का अभाव सार्वजनिक दायित्वों से बचने का आधार नहीं हो सकता। अदालत ने जनहित याचिका का निष्पादन करते हुए सभी निर्देशों का समयबद्ध पालन सुनिश्चित करने को कहा है।