रांची से प्रकाशित विवरण के अनुसार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का साल भर चला शताब्दी समारोह 10 अक्टूबर को समाप्त हो गया। इसके बाद स्वयंसेवकों का ध्यान पंच परिवर्तन और नशामुक्ति से जुड़े कार्यों पर केंद्रित किया जाएगा। संगठन के प्रांत और क्षेत्र स्तर के अधिकारी जिलों तथा विभागों के प्रस्तावित परिसीमन को लेकर अलग-अलग स्थानों पर बैठकें भी कर रहे हैं।
शताब्दी समारोह के अंतिम चरण में 20 सितंबर से 10 अक्टूबर के बीच अधिकतम स्थानों पर शाखाएं लगाने का अभियान चलाया गया। उपलब्ध जानकारी में दावा किया गया है कि इस अवधि में देशभर के चार लाख से अधिक स्थानों पर एक सप्ताह तक शाखाएं लगीं। अंतिम आंकड़े इंदौर में दो नवंबर से होने वाली अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में घोषित किए जाने हैं।
झारखंड के बारे में जारी विवरण में कहा गया है कि अभियान के दौरान 2,400 से अधिक स्थानों पर नई शाखाएं लगाई गईं। इससे पहले राज्य में करीब 800 स्थानों पर नियमित शाखाएं संचालित हो रही थीं। इस आधार पर एक सप्ताह के अभियान में राज्य के 3,200 से अधिक स्थानों तक शाखाओं की गतिविधि पहुंचने की बात कही गई है। अब इन शाखाओं को आगे भी नियमित रूप से चलाने की तैयारी है।
शताब्दी वर्ष के लिए सात प्रमुख कार्यक्रम तय किए गए थे। इनमें पूर्ण गणवेश में एकत्रीकरण, सामाजिक सद्भाव बैठक, गृह संपर्क अभियान, प्रबुद्धजन गोष्ठी, युवाओं के साथ संवाद, हिंदू सम्मेलन और अधिकतम स्थानों पर शाखाएं लगाना शामिल था। समारोह समाप्त होने के बाद सामाजिक गतिविधियों और नशामुक्ति पर काम को अगली कार्ययोजना का हिस्सा बताया गया है।
संगठनात्मक ढांचे में बदलाव की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। विवरण के मुताबिक, अगले वर्ष से देशभर में प्रांत की जगह 85 संभाग बनाए जाने की योजना है। इसी क्रम में जिलों और विभागों की संख्या बढ़ेगी तथा उनकी नई सीमाओं पर काम किया जा रहा है।
झारखंड में संघ की संगठनात्मक रचना के अंतर्गत जिलों की संख्या 28 से बढ़ाकर 53 किए जाने की बात कही गई है। कौन-सा क्षेत्र किस जिले और विभाग में शामिल होगा, इस पर जमीनी स्तर पर विचार-विमर्श जारी है। प्रस्तावित बदलावों की अंतिम घोषणा दो से चार नवंबर तक मध्य प्रदेश के इंदौर में होने वाली कार्यकारी मंडल की बैठक में होने की संभावना बताई गई है।