गिरिडीह/सियाटांड़: सूचना का अधिकार अधिनियम लागू होने के 21वें वर्ष में झारखंड राज्य सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त का पद रिक्त रहने और बड़ी संख्या में मामले लंबित होने का मुद्दा सामने आया है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, नेतृत्व का पद खाली होने से अपीलों और शिकायतों की सुनवाई प्रभावित हुई है।
आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त का पद नवंबर 2019 से रिक्त बताया गया है। आठ मई 2020 को तत्कालीन सूचना आयुक्त का कार्यकाल समाप्त होने के बाद आयोग के सभी पद खाली हो गए थे। इसके बाद सूचना मांगने वाले नागरिकों की अपीलों और शिकायतों पर सुनवाई बाधित रही।
झारखंड राज्य सूचना आयोग के लिए कुल सात पद स्वीकृत हैं। इनमें एक मुख्य सूचना आयुक्त और छह सूचना आयुक्तों के पद शामिल हैं। लंबे अंतराल के बाद जून 2026 में अनुज कुमार सिन्हा, तनुज खत्री, अमूल्य नीरज खलखो और शिवपूजन पाठक को सूचना आयुक्त नियुक्त किया गया।
चार नियुक्तियों के बावजूद मुख्य सूचना आयुक्त सहित तीन पद अब भी रिक्त हैं। दो जुलाई 2026 की रिपोर्ट में आयोग के समक्ष 23,350 मामले लंबित बताए गए थे। हालांकि, 12 अक्टूबर तक लंबित मामलों की नई आधिकारिक संख्या उपलब्ध नहीं होने की बात भी सामने आई है।
नियुक्तियों और आयोग की कार्यशीलता का प्रश्न झारखंड हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, अदालत ने 20 अगस्त 2026 को मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति में देरी पर चिंता जताते हुए कहा था कि आयोग अब भी कार्यशील नहीं है।
इसके बाद 17 सितंबर की सुनवाई में भी चार सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के बावजूद अध्यक्ष का पद खाली रहने की स्थिति दर्ज की गई। आयोग में रिक्त पद और लंबित मामले बने रहने से नागरिकों को सूचना तथा उनकी अपीलों पर समयबद्ध निर्णय मिलने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।