झारखंड से जुड़े कथित जीएसटी घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय ने 135 शेल या बोगस कंपनियों के इस्तेमाल का दावा किया है। एजेंसी के अनुसार, इन कंपनियों के माध्यम से बिना वास्तविक माल अथवा सेवाओं की आपूर्ति के 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के चालान जारी किए गए और 734 करोड़ रुपये से अधिक का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट तैयार किया गया।
ईडी ने बताया कि कार्रवाई की शुरुआत डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस, जमशेदपुर की शिकायतों के आधार पर हुई थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि तैयार किए गए इनपुट टैक्स क्रेडिट को कमीशन लेकर विभिन्न लाभार्थी फर्मों को दिया गया। इन फर्मों ने कथित तौर पर वास्तविक जीएसटी देनदारी घटाने और कर चोरी के लिए इसका उपयोग किया।
जांच में ज्ञान चंद जायसवाल और राज जायसवाल के समूह की भूमिका सामने आने का दावा किया गया है। ईडी के मुताबिक, आरोपियों ने अपने नाम के साथ परिवार के सदस्यों और कर्मचारियों के नाम पर भी कंपनियां बनाईं। एजेंसी ने मां शारदा इंडेवर प्राइवेट लिमिटेड, मेकर्स कास्टिंग प्राइवेट लिमिटेड, केदारनाथ ट्रिक्सिम प्राइवेट लिमिटेड और जय भोले एंटरप्राइजेज का उल्लेख किया है।
मामले में मई और अगस्त 2025 के दौरान कोलकाता, जमशेदपुर, रांची तथा अन्य स्थानों पर आरोपियों से जुड़े परिसरों में छापेमारी की गई थी। उस कार्रवाई में दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और नकदी जब्त किए जाने के साथ करीब 70 लाख रुपये के बैंक बैलेंस को फ्रीज करने की जानकारी दी गई है।
ईडी अब तक 20 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों को लेकर दो अस्थायी कुर्की आदेश जारी कर चुकी है। आठ मई 2025 को धनशोधन निवारण कानून के तहत चार आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनमें से तीन अभी न्यायिक हिरासत में हैं।
एजेंसी ने एक अक्टूबर को ज्ञान चंद जायसवाल और राज जायसवाल को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद दोनों को जेल भेज दिया गया। रांची की विशेष अदालत में ईडी ने दोनों पर जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया था। एजेंसी के अनुसार, वित्तीय लेनदेन और कथित अवैध राशि से चल-अचल संपत्तियां खरीदे जाने समेत मामले के अन्य पहलुओं की जांच अभी जारी है।