एचईसी के पुनरुद्धार और बकाया वेतन के लिए झारखंड के सांसदों से मिलेगा मजदूर संघ

एचईसी मजदूर संघ ने संस्थान के पुनरुद्धार, कार्यशील पूंजी और 32 महीने के बकाया वेतन के मुद्दे पर झारखंड के लोकसभा व राज्यसभा सांसदों से समर्थन मांगने का निर्णय लिया है।

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रांची स्थित एचईसी के पुनरुद्धार और कर्मचारियों के बकाया वेतन पर मजदूर संघ की पहल

रांची स्थित हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (एचईसी) के पुनरुद्धार और कर्मचारियों के बकाया वेतन को लेकर एचईसी मजदूर संघ ने झारखंड के सभी लोकसभा और राज्यसभा सांसदों से मिलने की योजना बनाई है। संघ का कहना है कि प्रतिनिधिमंडल सांसदों से संस्थान की समस्याओं को केंद्र सरकार के समक्ष उठाने और समाधान के लिए साझा पहल करने का आग्रह करेगा।

सुनील कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई संघ की बैठक में एचईसी की मौजूदा स्थिति, कर्मचारियों के भविष्य और आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक में तय किया गया कि केंद्र सरकार का अंतिम निर्णय आने से पहले राज्य के सांसदों से संपर्क कर संस्थान के पक्ष में समर्थन जुटाया जाएगा।

संघ के महामंत्री रमाशंकर प्रसाद के अनुसार, हाल में एक संसदीय समिति ने एचईसी का दौरा किया था। मजदूर संघ अब समिति की रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपे जाने और उस पर होने वाले निर्णय की प्रतीक्षा कर रहा है। संघ ने कहा कि वह इस प्रक्रिया पर नजर बनाए रखेगा और सांसदों के माध्यम से कर्मचारियों तथा संस्थान की जरूरतों को केंद्र तक पहुंचाएगा।

बैठक में संसदीय समिति की सिफारिशों के आधार पर एचईसी के लिए विशेष वित्तीय पैकेज और कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने की मांग उठाने का निर्णय भी हुआ। संघ का मानना है कि पर्याप्त वित्तीय सहायता मिलने पर संस्थान की गतिविधियों को गति देने और मौजूदा संकट से निकलने में मदद मिल सकती है।

कर्मचारियों और अधिकारियों का 32 महीने का वेतन बकाया होना बैठक का प्रमुख विषय रहा। संघ ने बकाया राशि का तत्काल भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की। पदाधिकारियों ने कहा कि लंबे समय से वेतन नहीं मिलने के कारण कर्मचारियों और उनके परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है तथा उनके भविष्य को लेकर चिंता बनी हुई है।

मजदूर संघ ने राज्य के सांसदों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एचईसी के पुनरुद्धार के लिए एकजुट होने की अपील करने का निर्णय लिया है। बैठक में संघ के कई पदाधिकारी मौजूद रहे। आगे की पहल सांसदों के साथ मुलाकात और संसदीय समिति की रिपोर्ट पर केंद्र सरकार के निर्णय के आधार पर तय होने की संभावना है।