रांची में झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की जेलों में रिक्त पदों पर नियुक्ति में हो रही देरी पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने गृह सचिव के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की अवधि सात दिसंबर तक बढ़ाते हुए इस समय-सीमा के भीतर अपने आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
सोमवार को चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। इस दौरान गृह सचिव की ओर से कारण बताओ नोटिस का जवाब दाखिल किया गया। सरकार की तरफ से भर्ती प्रक्रिया जल्द पूरी करने का आश्वासन भी दिया गया, लेकिन खंडपीठ ने प्रस्तुत जवाब पर असंतोष जताया।
अदालत को बताया गया कि गृह विभाग ने असिस्टेंट जेलर और जेल वार्डर पदों पर नियुक्ति के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षा की तारीखें निर्धारित कर दी हैं। परीक्षा अलग-अलग जोन में अलग तिथियों पर आयोजित की जानी है। विभाग की ओर से इस प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने की बात कही गई।
इसके बावजूद अदालत ने केवल परीक्षा की तारीखें तय किए जाने को पर्याप्त नहीं माना। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि सात दिसंबर तक पूर्व आदेश का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। इस अवधि तक गृह सचिव के विरुद्ध अवमानना कार्रवाई को आगे बढ़ाने की समय-सीमा बढ़ाई गई है।
मामला राज्य की जेलों में लंबे समय से रिक्त पड़े पदों और उन्हें भरने की प्रक्रिया से जुड़ा है। सुनवाई का केंद्र यह रहा कि अदालत के निर्देश के बाद नियुक्ति प्रक्रिया कितनी आगे बढ़ी और इसे पूरा करने के लिए सरकार ने क्या ठोस कदम उठाए हैं।
अब गृह विभाग के सामने निर्धारित अवधि में शारीरिक दक्षता परीक्षा सहित भर्ती की जरूरी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है। सात दिसंबर तक होने वाली प्रगति और आदेश के अनुपालन की स्थिति आगे की न्यायिक कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण होगी।