दुमका स्थित सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय में विभिन्न शैक्षणिक और प्रशासनिक मांगों को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की बेमियादी भूख हड़ताल को पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा का समर्थन मिला है। उन्होंने झारखंड सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन से आंदोलनरत विद्यार्थियों की बात गंभीरता से सुनने तथा तत्काल संवाद शुरू करने की अपील की है।
आंदोलन कर रहे विद्यार्थी परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितता, लंबित परीक्षाओं और परिणामों के साथ पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग उठा रहे हैं। उनकी मांगों में छात्र शिकायत समाधान केंद्र स्थापित करना और विश्वविद्यालय से जुड़े प्रशासनिक भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराना भी शामिल है।
विद्यार्थियों ने शैक्षणिक तथा परिसर की सुविधाओं से जुड़े विषय भी आंदोलन में शामिल किए हैं। वे बेहतर छात्रावास और पुस्तकालय, स्नातक पाठ्यक्रमों की सीटों की बहाली, बीएड की सीटों में वृद्धि तथा एलएलबी की पढ़ाई शुरू करने की मांग कर रहे हैं। पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने की मांग भी रखी गई है।
मुंडा ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में विद्यार्थियों को राज्य के वर्तमान और भविष्य से जोड़ा। उनका कहना है कि बुनियादी शैक्षणिक समस्याओं के समाधान के लिए विद्यार्थियों को आंदोलन और भूख हड़ताल करनी पड़े, यह चिंता का विषय है। उन्होंने सभी मांगों पर पारदर्शी और तय समय के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।
पूर्व मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य सरकार से संवेदनशीलता के साथ छात्रों की आवाज सुनने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई, समय और भविष्य प्रभावित नहीं होना चाहिए। हालांकि, उपलब्ध विवरण में सरकार या विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से मांगों पर किसी औपचारिक निर्णय अथवा प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं है।
इस समर्थन के बाद विश्वविद्यालय में चल रहा छात्र आंदोलन राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया है। फिलहाल आंदोलन की मुख्य अपेक्षा यह है कि विश्वविद्यालय प्रशासन सीधे वार्ता करे और परीक्षा, परिणाम, पुनर्मूल्यांकन, प्रवेश तथा छात्र सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट और समयबद्ध कदम बताए।