रांची में झारखंड हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) में लंबित प्रारंभिक जांच के मामलों को तीन महीने की निर्धारित अवधि में पूरा करने का निर्देश दिया है। अदालत ने जांच की गति बढ़ाने और तय समय के भीतर मामलों का निष्पादन सुनिश्चित करने को कहा है।
चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मंगलवार को स्वतः संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। मामला एसीबी की प्रारंभिक जांच लंबे समय तक लंबित रहने से जुड़ा था। अदालत ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए पहले स्वतः संज्ञान लिया था और इसे जनहित याचिका में बदल दिया था।
खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि सामान्य तौर पर प्रारंभिक जांच तीन महीने में पूरी की जानी चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर इसकी अवधि अधिकतम छह महीने तक बढ़ाई जा सकती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रारंभिक स्तर पर चल रही जांच को अनिश्चित समय तक लंबित रहने से रोकना है।
अदालत के निर्देश के अनुसार, किसी मामले में प्रारंभिक जांच छह महीने के बाद भी जारी रखने की जरूरत पड़ती है तो उसका उचित कारण रिकॉर्ड करना अनिवार्य होगा। कारण दर्ज किए बिना जांच की अवधि आगे नहीं बढ़ाई जा सकेगी। इस तरह अवधि बढ़ाने के निर्णय को लिखित आधार से जोड़ दिया गया है।
हाईकोर्ट ने एसीबी में लंबित प्रारंभिक जांच के मामलों की स्थिति पर छह महीने बाद स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया है। रिपोर्ट के जरिए अदालत को यह जानकारी दी जानी है कि लंबित मामलों के निपटारे और तय समय सीमा के पालन की स्थिति क्या रही।
समय सीमा, अवधि बढ़ाने के लिए दर्ज कारण और बाद में पेश की जाने वाली स्थिति रिपोर्ट—इन तीन स्तरों पर अदालत ने एसीबी की लंबित जांचों के लिए स्पष्ट प्रक्रिया तय की है। निर्देश जारी करने के साथ खंडपीठ ने जनहित याचिका का निष्पादन कर दिया।