जेएसएससी-सीजीएल जांच: दुग्धा के क्वार्टर में अभ्यर्थियों को उत्तर रटाने का सीआईडी का दावा

सीआईडी ने अदालत में कहा कि बोकारो के दुग्धा स्थित बीसीसीएल क्वार्टर में परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को जुटाकर उनके मोबाइल जमा कराए गए और कथित प्रश्न-उत्तर याद कराए गए।

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बोकारो के दुग्धा स्थित क्वार्टर से जुड़े जेएसएससी-सीजीएल मामले की जांच

जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच के दौरान बोकारो के दुग्धा स्थित एक बीसीसीएल क्वार्टर की भूमिका सामने आई है। अदालत में रखी गई जांच सामग्री के आधार पर सीआईडी का दावा है कि परीक्षा से पहले वहां अभ्यर्थियों को एकत्र कर प्रश्नों के उत्तर याद कराने की व्यवस्था की गई थी। ये बातें अभी जांच और अभियोजन पक्ष के दावों का हिस्सा हैं।

सीआईडी की ओर से अदालत को दी गई जानकारी के अनुसार, 20 सितंबर 2024 को बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को क्वार्टर में लाया गया था। जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा 21 और 22 सितंबर 2024 को आयोजित हुई थी। जांच एजेंसी का कहना है कि परीक्षा से ठीक पहले कथित प्रश्न-उत्तर सामग्री वहां पहुंचाई गई थी।

जांच सामग्री में दर्ज विवरण के मुताबिक, क्वार्टर में मौजूद अभ्यर्थियों के मोबाइल फोन जमा करा लिए गए थे। इसके बाद उन्हें उपलब्ध कराई गई सामग्री के उत्तर याद करने को कहा गया। सीआईडी ने दावा किया है कि वहां बताई गई सामग्री के प्रश्न बाद में हुई वास्तविक परीक्षा के सवालों से मेल खाते थे।

अदालत के समक्ष रखी गई सामग्री में उमेश कुमार राय से संबंधित एक बयान का भी उल्लेख है। इसमें अभ्यर्थियों को लाने, कथित चयन सुनिश्चित कराने और इसके लिए पैसे के लेन-देन से जुड़ी बातचीत का विवरण होने की बात कही गई है। रितेश सिंह उर्फ मुन्ना और मिथिलेश सिंह उर्फ आरके सिंह पर कथित सामग्री क्वार्टर तक पहुंचाने का आरोप है।

सीआईडी इस प्रकरण को किसी एक अभ्यर्थी की व्यक्तिगत नकल के बजाय कई लोगों और लाभार्थियों से जुड़ी संभावित संगठित व्यवस्था के रूप में देख रही है। एजेंसी के अनुसार, वित्तीय सुराग और भुगतान से जुड़े बयानों की भी जांच की जा रही है। हालांकि इन आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में होना बाकी है।

जांच एजेंसी ने सह-आरोपी अभय कुमार तिवारी के बयान का भी हवाला दिया है। कथित तौर पर उस बयान में दुग्धा के क्वार्टर पर अभ्यर्थियों को प्रश्न-उत्तर सामग्री दिए जाने और बाद में उसे नष्ट किए जाने का जिक्र है। अदालत में पेश दावों और उपलब्ध साक्ष्यों की आगे की पड़ताल मुकदमे की प्रक्रिया के दौरान की जाएगी।