करमा पूजा पर झारखंड पुलिस मुख्यालय का अलर्ट, विसर्जन स्थलों पर विशेष निगरानी के निर्देश

झारखंड पुलिस मुख्यालय ने 22 और 23 सितंबर को होने वाली करमा पूजा के लिए जिलों को सतर्कता बढ़ाने तथा पुलिस, प्रशासन, बिजली विभाग और एसडीआरएफ के बीच समन्वय रखने का निर्देश दिया है।

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करमा पूजा की सुरक्षा तैयारियों को लेकर झारखंड पुलिस मुख्यालय का निर्देश

रांची में झारखंड पुलिस मुख्यालय ने 22 और 23 सितंबर को होने वाली करमा पूजा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सभी जिलों के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया है। मुख्यालय ने पूजा से पहले ही आवश्यक तैयारियां पूरी करने और संबंधित विभागों के बीच समन्वय बनाए रखने को कहा है।

निर्देशों में करम डाल के विसर्जन को सुरक्षा की दृष्टि से प्रमुख बिंदु माना गया है। नदी, तालाब और अन्य जलाशयों में दुर्घटनाएं रोकने के लिए प्रशासन को पहले से व्यवस्था करने को कहा गया है। पुलिस, बिजली विभाग और एसडीआरएफ को आपसी तालमेल के साथ जरूरी सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

पुलिस मुख्यालय ने पूजा स्थलों, अखाड़ों और संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखने को कहा है। पूजा समितियों तथा शांति समिति के सदस्यों के साथ बैठक कर स्थानीय स्तर के विवादित बिंदुओं का समाधान करने का भी निर्देश है। महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए पूजा स्थलों पर मजबूत बैरिकेडिंग की व्यवस्था करने को कहा गया है।

जुलूस और सार्वजनिक आयोजनों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है। निर्देश के अनुसार, डीजे पर बजने वाले उत्तेजक गीतों और भड़काऊ नारों की निगरानी की जाएगी। शराब की बिक्री वाले स्थानों पर नजर रखने तथा अवैध शराब और जुआ अड्डों के खिलाफ कार्रवाई करने को भी कहा गया है।

सोशल मीडिया की निगरानी के लिए भी जिलों को सचेत किया गया है। व्हाट्सऐप, फेसबुक और अन्य मंचों पर समुदाय, धर्म या जाति की भावनाओं को आहत करने अथवा नफरत फैलाने वाली टिप्पणियों पर नजर रखने का निर्देश है। किसी अफवाह से आकस्मिक स्थिति पैदा होने पर त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था तैयार रखने को कहा गया है।

मुख्यालय के पत्र में पिछले वर्षों के दौरान विसर्जन के समय डूबने और जुलूसों में विवाद की घटनाओं का उल्लेख करते हुए एहतियात की आवश्यकता बताई गई है। इस बार प्रशासन को जलाशयों, पूजा स्थलों और जुलूस मार्गों से जुड़े जोखिमों की पहले पहचान कर सुरक्षा उपाय लागू करने तथा स्थानीय समितियों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखने को कहा गया है।