खरसावां के माता पाउड़ी शक्तिपीठ में संपन्न हुई वार्षिक जंताल पूजा

कुम्हारसाही स्थित माता पाउड़ी शक्तिपीठ में श्रद्धालुओं ने नई फसल अर्पित कर क्षेत्र की सुख-शांति और अच्छी पैदावार की प्रार्थना की।

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सरायकेला-खरसावां जिले के खरसावां स्थित माता पाउड़ी शक्तिपीठ में वार्षिक जंताल पूजा श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुई। कुम्हारसाही के इस पूजा स्थल पर आयोजित अनुष्ठान में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और क्षेत्र की सुख-शांति तथा अच्छी फसल की कामना की।

पूजा की शुरुआत देउरी सुकरा नायक ने माता पाउड़ी की आराधना से की। इसके बाद विधि-विधान के अनुसार अनुष्ठान किए गए। श्रद्धालुओं ने खेतों से प्राप्त पहली उपज देवी को समर्पित की और माता के दरबार में अपनी मनोकामनाएं रखीं। अनुष्ठान के क्रम में बकरे और भेड़ की बलि भी दी गई।

स्थानीय परंपरा में इस पूजा का संबंध नई धान की फसल से है। जंताल पूजा पूरी होने के बाद ही नई फसल के धान से तैयार चावल खाने की परंपरा बताई गई है। इस कारण आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ स्थानीय कृषि जीवन और फसल चक्र से भी जुड़ा हुआ है।

माता पाउड़ी को भगवती का एक स्वरूप माना जाता है। शक्तिपीठ में प्रत्येक गुरुवार को नियमित पूजा होती है, जबकि वार्षिक जंताल पूजा खरसावां के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल है। आयोजन को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन की ओर से भी विशेष व्यवस्था की गई थी।

देउरी सुकरा नायक के अनुसार, इस पूजा की परंपरा 13वीं सदी से भी पुरानी है। उपलब्ध विवरण में बताया गया है कि खरसावां के तत्कालीन राजा की ओर से वर्ष 1356 से माता पाउड़ी की पूजा की जाती रही। पहले वार्षिक आयोजन की जिम्मेदारी राजपरिवार निभाता था।

आजादी के बाद व्यवस्था में बदलाव आया और वर्ष 1949 से पूजा का खर्च राज्य सरकार वहन कर रही है। लंबे समय से जारी यह आयोजन खरसावां की धार्मिक विरासत, नई फसल के प्रति कृतज्ञता और सामुदायिक आस्था को एक साथ अभिव्यक्त करता है।