कुडू ट्रॉमा सेंटर में विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं, सीएचसी के एक चिकित्सक पर इलाज की जिम्मेदारी

लोहरदगा के कुडू ट्रॉमा सेंटर में चिकित्सक का पद स्वीकृत नहीं है। विशेषज्ञ, लैब टेक्नीशियन और वार्ड ब्वाय की कमी के बीच इसकी सेवाएं सीएचसी और आउटसोर्स कर्मियों के भरोसे चल रही हैं।

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लोहरदगा के कुडू स्थित ट्रॉमा सेंटर की स्वास्थ्य व्यवस्था

लोहरदगा जिले के कुडू स्थित ट्रॉमा सेंटर में अलग से किसी चिकित्सक का पद स्वीकृत नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सेंटर की जिम्मेदारी कुडू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के एक डॉक्टर संभाल रहे हैं। इससे सीएचसी की नियमित सेवाओं के साथ दुर्घटना में घायल मरीजों का उपचार करना चुनौतीपूर्ण हो रहा है।

ट्रॉमा सेंटर में विशेषज्ञ चिकित्सक भी उपलब्ध नहीं हैं। लोहरदगा के सिविल सर्जन डॉ. राजू कच्छप ने सेंटर में किसी विशेषज्ञ डॉक्टर के नहीं होने की पुष्टि की है। हड्डियों में फ्रैक्चर या दूसरी गंभीर चोट वाले मरीजों को विशेषज्ञ उपचार की जरूरत पड़ने पर अन्य अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है।

स्वास्थ्यकर्मियों की स्थिति भी सीमित है। जीएनएम के तीन, ड्रेसर के तीन और सफाईकर्मी के तीन स्वीकृत पदों पर आउटसोर्सिंग के माध्यम से कर्मी तैनात हैं। वहीं, लैब टेक्नीशियन का एक पद और वार्ड ब्वाय के तीनों पद खाली बताए गए हैं। इस कारण ट्रॉमा सेंटर की कार्यक्षमता उपलब्ध कर्मचारियों और सीएचसी के संसाधनों पर निर्भर है।

कुडू क्षेत्र से राष्ट्रीय राजमार्ग-39 और राष्ट्रीय राजमार्ग-143ए गुजरते हैं। रिपोर्ट में इन मार्गों पर हाल के महीनों में हुई कई दुर्घटनाओं का उल्लेख है। अप्रैल में ढुलुवाखुंटा के पास ट्रक और स्कूटी की टक्कर में एक परिवार के तीन लोगों की मौत हुई थी। पलौटी चर्च गेट के पास कार के पेड़ से टकराने पर एक परिवार के पांच लोग घायल हुए थे।

मई में कुडू-चंदवा सीमा के पास ओवरटेक के दौरान हुई दुर्घटना में पांच लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इसी महीने नवाटोली के पास कार की टक्कर से बाइक सवार दंपती घायल हुए, जबकि उनकी एक वर्षीय बच्ची सुरक्षित रही। जुलाई में हेंजला के पास घायल बाइक सवार को कुडू सीएचसी लाया गया था, जहां बिजली नहीं होने के कारण मोबाइल की रोशनी में उपचार करना पड़ा था।

स्थानीय निवासी गोपाल अग्रवाल ने डॉक्टरों की कमी पर सवाल उठाया है। झामुमो जिलाध्यक्ष मोजम्मिल अहमद ने कहा है कि वह व्यवस्था में सुधार के लिए सिविल सर्जन और उपायुक्त से बात करेंगे। बढ़ते यातायात और दुर्घटनाओं के बीच अलग चिकित्सक, विशेषज्ञ तथा रिक्त स्वास्थ्यकर्मी पदों की व्यवस्था ट्रॉमा सेंटर की सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है।