केतार में सोन का जलस्तर बढ़ा, खैरवा-कधवन के खेतों में घुसा बाढ़ का पानी

लगातार बारिश और बांधों से पानी छोड़े जाने के बीच सोन नदी खतरे के निशान से ऊपर बताई गई है। खैरवा और कधवन में धान, मक्का, तिल व अरहर की फसलें डूबने से किसान चिंतित हैं।

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गढ़वा जिले के केतार प्रखंड में सोन नदी का बढ़ता जलस्तर तटीय गांवों और खेती के लिए चिंता का कारण बन गया है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार दोपहर खैरवा और कधवन गांव के खेतों तक बाढ़ का पानी पहुंच गया। खेतों में लगी धान, मक्का, तिल और अरहर की फसलें पानी में डूब गईं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि सोन नदी के जलग्रहण क्षेत्र और आसपास के इलाकों में तीन दिनों से लगातार बारिश हो रही है। इसके कारण रिहंद और ओबरा बांधों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। दोनों बांधों से छोड़ा गया पानी सोन नदी में पहुंचने के बाद नदी और उससे जुड़े निचले इलाकों में पानी की आवक बढ़ी है।

सोन नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बताया जा रहा है। खैरवा और कधवन में फसलों के जलमग्न होने से किसानों के सामने नुकसान की आशंका खड़ी हो गई है। हालांकि उपलब्ध विवरण में प्रभावित खेतों के कुल क्षेत्रफल या फसल क्षति का कोई आधिकारिक आकलन नहीं दिया गया है।

स्थानीय ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि नदी का पानी इसी गति से बढ़ता रहा तो तटीय इलाकों में बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो सकती है। लगातार बारिश, बांधों से पानी की निकासी और नदी के बढ़ते प्रवाह को देखते हुए निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए सावधानी जरूरी बताई गई है।

स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने सोन के तटीय इलाकों में अलर्ट जारी किया है। थाना प्रभारी अरुण कुमार रवानी ने लोगों से नदी के किनारे नहीं जाने और प्रशासन की ओर से जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की है। किसी अप्रिय घटना की जानकारी मिलने पर तत्काल थाने को सूचना देने को भी कहा गया है।

फिलहाल प्रशासन की चेतावनी का केंद्र लोगों को नदी से दूर रखना और संभावित जोखिम को कम करना है। प्रभावित गांवों में आगे की स्थिति सोन के जलस्तर और बारिश पर निर्भर करेगी। उपलब्ध रिपोर्ट में किसी व्यक्ति के हताहत होने या मकानों को नुकसान पहुंचने की सूचना नहीं दी गई है।