केपटाउन सम्मेलन में झारखंड विधानसभा अध्यक्ष ने समावेशी और सुगम संसद पर रखे विचार

राष्ट्रमंडल संसदीय संघ के 69वें सम्मेलन में विधानसभा अध्यक्ष रबीन्द्रनाथ महतो ने दिव्यांगजनों की लोकतांत्रिक भागीदारी और संस्थानों की सुगमता का मुद्दा उठाया।

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केपटाउन सम्मेलन में झारखंड विधानसभा के प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी

रांची से झारखंड का एक प्रतिनिधिमंडल विधानसभा अध्यक्ष रबीन्द्रनाथ महतो के नेतृत्व में राष्ट्रमंडल संसदीय संघ के 69वें सम्मेलन में भाग लेने के लिए दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन पहुंचा है। सम्मेलन 13 से 19 सितंबर तक आयोजित किया जा रहा है। प्रतिनिधिमंडल में विधायक मथुरा प्रसाद महतो और दशरथ गागराई भी शामिल हैं।

सम्मेलन की मंगलवार की कार्यशाला में विधानसभा अध्यक्ष ने दिव्यांग लोगों के लिए संसद और लोकतांत्रिक संस्थानों को सुलभ बनाने के विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने दिव्यांगजनों को लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिक, मतदाता, प्रतिनिधि, नेता और निर्णयकर्ता के रूप में समान भागीदारी देने की आवश्यकता बताई।

अपने संबोधन में महतो ने भारत में दिव्यांग नागरिकों के लिए चल रही व्यवस्थाओं का उल्लेख किया। इनमें पहचान और सरकारी लाभ तक पहुंच आसान बनाने वाली विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र प्रणाली तथा भौतिक और संस्थागत बाधाओं को कम करने के उद्देश्य से संचालित सुगम्य भारत अभियान शामिल हैं।

उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में उपलब्ध सुविधाओं की भी जानकारी दी। घर से मतदान, व्हीलचेयर, परिवहन और स्वयंसेवकों की सहायता जैसी व्यवस्थाओं को दिव्यांग मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाने वाला बताया गया। झारखंड के 2024 के चुनाव में घर से मतदान और मतदाताओं को वाहन से मतदान केंद्र तक पहुंचाने की सुविधाओं का भी संबोधन में जिक्र हुआ।

विधानसभा अध्यक्ष ने डिजिटल पहुंच को भी अधिकार के रूप में महत्व देने की बात कही। उन्होंने बताया कि भारत का दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 कुल 21 प्रकार की दिव्यांगताओं को मान्यता देता है। संबोधन में मार्च 2026 तक 1.34 करोड़ से अधिक विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र जारी किए जाने का आंकड़ा भी प्रस्तुत किया गया।

राष्ट्रमंडल संसदीय संघ की स्थापना 1911 में हुई थी। यह अब 56 देशों की 180 विधायी संस्थाओं वाला वैश्विक मंच है। इससे पहले 68वां सम्मेलन बारबाडोस के ब्रिजटाउन में आयोजित हुआ था, जहां समावेशी शासन, लैंगिक समानता और वंचित वर्गों की भागीदारी जैसे विषयों पर चर्चा हुई थी।