केरसई में पांच किलोमीटर जर्जर सड़क सुधारने उतरे ग्रामीण, श्रमदान से शुरू की मरम्मत

सिमडेगा के केरसई प्रखंड में चापाबारी से बाकीकोना और धांगरीनाचा तक बदहाल सड़क से परेशान ग्रामीणों ने सामूहिक श्रमदान कर मरम्मत शुरू की है।

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केरसई प्रखंड में जर्जर सड़क की श्रमदान से मरम्मत करते ग्रामीण

सिमडेगा जिले के केरसई प्रखंड में लंबे समय से जर्जर सड़क से परेशान ग्रामीणों ने स्वयं इसे चलने योग्य बनाने की पहल की है। चापाबारी से बाकीकोना और धांगरीनाचा तक जाने वाले करीब पांच किलोमीटर लंबे मार्ग की मरम्मत के लिए महिला और पुरुष कुदाल तथा दूसरे औजार लेकर श्रमदान में जुट गए हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, सड़क कई वर्षों से खराब है और इस पर सामान्य आवागमन भी कठिन हो गया है। राशन तथा रोजमर्रा की जरूरतों का सामान लाने के लिए लोगों को इसी रास्ते का उपयोग करना पड़ता है। बरसात या आपात स्थिति में उनकी परेशानी और बढ़ जाती है।

इस मार्ग की खराब हालत का सबसे गंभीर असर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के दौरान पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वाहन नहीं पहुंच पाने की स्थिति में मरीजों को खटिया पर ले जाना पड़ता है। धांगरीनाचा कोरवा आदिम जनजाति बहुल गांव है, इसलिए यह रास्ता वहां के निवासियों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क साधन है।

ग्रामीणों ने बताया कि सड़क की स्थायी मरम्मत के लिए कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के सामने समस्या रखी गई, लेकिन अब तक समाधान नहीं हुआ। इससे पहले भी स्थानीय लोगों ने श्रमदान करके मार्ग को आवागमन योग्य बनाया था। दोबारा स्थिति बिगड़ने पर उन्होंने सामूहिक रूप से मरम्मत करने का निर्णय लिया।

स्थानीय निवासियों के मुताबिक, यह मार्ग आसपास के गांवों को जोड़ने के साथ सिमडेगा से छत्तीसगढ़ की सीमा की ओर संपर्क में भी उपयोगी है। ऐसे में सड़क की बदहाली केवल एक गांव की समस्या नहीं है, बल्कि इससे क्षेत्र के अनेक लोगों की दैनिक आवाजाही प्रभावित होती है।

श्रमदान से फिलहाल रास्ते को उपयोग लायक बनाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन ग्रामीण इसे स्थायी समाधान नहीं मानते। उन्होंने प्रशासन से सड़क का टिकाऊ निर्माण या समुचित मरम्मत कराने की मांग की है, ताकि मरीजों, विद्यार्थियों और रोजमर्रा के काम से आने-जाने वाले लोगों को बार-बार ऐसी कठिनाई का सामना न करना पड़े।