रांची में वन एवं पर्यावरण विभाग के सामने कैंपा फंड की अगली किस्त हासिल करने के लिए पिछली राशि के उपयोग का हिसाब देने की शर्त है। उपलब्ध विभागीय जानकारी के मुताबिक, राज्य को करीब 350 करोड़ रुपये की अगली किस्त से पहले 67 करोड़ रुपये का उपयोगिता प्रमाणपत्र केंद्र सरकार को जमा करना होगा।
केंद्र ने क्षतिपूर्ति वनरोपण योजना के अंतर्गत झारखंड को तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक देने पर सहमति जताई है। मौजूदा वित्त वर्ष के लिए प्रस्तावित राशि एक हजार करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। पिछले वित्त वर्ष में राज्य को इस मद में 300 करोड़ रुपये से अधिक मिले थे, जिसके एक हिस्से के खर्च का प्रमाण अभी देना बाकी है।
कैंपा की राशि का इस्तेमाल वनीकरण, वन्यजीव प्रबंधन और पारिस्थितिकी तंत्र में सुधार से जुड़े कार्यों में होना है। इसके साथ वन क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय समुदायों के जीवनस्तर को बेहतर बनाने वाली योजनाएं भी इस निधि के दायरे में आती हैं।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में झारखंड को कैंपा फंड के तहत 654.62 करोड़ रुपये मिले थे। इसमें से 275.78 करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि 378.84 करोड़ रुपये वापस करने पड़े। पिछले छह वर्षों में भी कई बार पूरी राशि खर्च नहीं हो पाने के कारण उसे लौटाने की स्थिति बनी है।
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कैंपा फंड में झारखंड को 1,777.93 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव है। हालांकि पिछली किस्त से जुड़े उपयोगिता प्रमाणपत्र की शर्त के कारण नई राशि का एक हिस्सा रुका हुआ है। विभाग इस वित्त वर्ष में निधि के बेहतर प्रबंधन और योजनाओं को समय पर पूरा करने की दिशा में काम कर रहा है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हाल की समीक्षा में अधिकारियों को कैंपा से स्वीकृत योजनाओं का पारदर्शी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने और उन्हें तय समय में पूरा करने का निर्देश दिया है। उन्होंने राशि का लाभ वन क्षेत्रों के स्थानीय समुदायों के विकास तक पहुंचाने पर भी जोर दिया है।